मुकेश वर्मा
हरिद्वार। जिला महिला चिकित्सालय हरिद्वार के चिकित्सकों की 10 सदस्य टीम ने आपातकालीन स्थिति में 16 वर्षीय एक किशोरी के पेट का ऑपरेशन कर करीब एक किलो की गांठ निकाली गई। चिकित्सकों का कहना हैं कि यदि समय रहते किशोरी के पेट का ऑपरेशन नहीं किया जाता, तो उसकी जान भी जा सकती थी। ऑपरेशन के बाद किशोरी की स्थिति स्थिर है और अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रही है। परिजनों ने मरीज की जान बचाने पर चिकित्सकों को आभार जताया है।
जिला महिला चिकित्सालय के पीएमएस डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि बीते रोज ज्वालापुर निवासी एक परिवार अपनी 16 वर्षीय किशोरी को गंभीर पेट दर्द की शिकायत पर अस्पताल लाया गया। जहां पर चिकित्सकों ने प्रांरभिक परीक्षण करने पर पेट में एक संदिग्ध गांठ महसूस की गई। जब किशोरी की अल्ट्रासाउंड जांच की गई तो पेट में ओवेरियन टॉर्शन की पुष्टि हुई, जो एक गंभीर स्त्रीरोग संबंधी आपातकालीन स्थिति थी। इस स्थिति में समय पर शल्य चिकित्सा न किए जाने पर अंडाशय को स्थायी क्षति होने का गंभीर जोखिम था।
उन्होंने बताया कि किशोरी के परिजनों को तत्काल ऑपरेशन कराने की सलाह दी गई, लेकिन परिजन किशोरी के ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं थे। और किशोरी को वापस घर ले गये, लेकिन किशोरी की अचानक तबीयत बिगडने पर दोबारा अस्पताल लाया गया। किशोरी की स्थिति देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया। चिकित्सक डॉ. यशपाल तोमर के नेतृत्व में 10 सदस्य टीम ने किशोरी के पेट का करीब डेढ घंटे ऑपरेशन के बाद पेट से करीब एक किलो की गांठ निकाली गयी। यदि समय पर किशोरी का ऑपरेशन नहीं होता हो उसकी जान भी जा सकती थी। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति पूर्णतः स्थिर हैं और चिकित्सकों की निगरानी में है। किशोरी की जान बचाने पर परिजनों ने चिकित्सकों का आभार जताया है।
ऑपरेशन करने वाली चिकित्सकों की टीम में डॉ. यशपाल तोमर, डॉ. वसुंधरा सोलंकी, डॉ. दीपा चौहान, एनेस्थीसिया टीम में डॉ. हरिशंकर, एसएनओ हिमांशु, हिमानी और विजयलक्ष्मी आदि शामिल रहे।
