पीडित नेत्री पड़ोसी परिवार के उत्पीड़न व मारपीट से हैं परेशान
एसएसपी व नगर मजिस्ट्रेट से गुहार पर भी नहीं मिल पा रहा न्याय
बुजुर्ग-बीमार व असहाय नेत्री टूक टूकी लगाकर प्रशासन को देख रही
विडम्बनाः कल तक दूसरों को न्याय दिलाया, आज खुद न्याय के लिए तरस रही
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। शहर की एक वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री को अपने पड़ोसी परिवार से अपनी जान माल की सुरक्षा के लिए दर-दर की ठोकरे खाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पीडिता ने एसएसपी से लेकर नगर मजिस्ट्रेट तक न्याय की गुहार लगाने के बावजूद भी उसको न्याय नहीं मिल पा रहा है। पीडित प्रशासन की उपेक्षा से हताश व निराश हो चुकी है। पीडिता की उम्र ढलने के साथ-साथ बीमार होने के कारण उसकी हिम्मत भी अब जबाब देने लगी है।

विडम्बना देखो कल तक जिस कांग्रेसी नेत्री ने दूसरे पीडितों को न्याय दिलाया, आज उसे ही अपनी जान माल की सुरक्षा के लिए दर-दर की ठोकरे खानी पड़ रही है। आखिर प्रशासन बुजुर्ग व बीमार नेत्री को न्याय क्यों नहीं दिला पा रहा है?। क्या पड़ोसी परिवार प्रशासन से भी ज्यादा ताकतवर हैं? जिसके चलते प्रशासन बुजुर्ग, बीमार व लाचार हो चुकी पीडिता को न्याय नहीं दिला पा रहा है। जिसको लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगने लगे है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 70 वर्षीय वरिष्ठ कांग्रेसी नेत्री बीना कपूर निवासी मायापुर कोतवाली नगर हरिद्वार ने एसएसपी हरिद्वार और नगर मजिस्ट्रेट को एक शिकायती पत्र देकर कर शिकायत की है। पीडिता ने शिकायत में कहा हैं कि वह एक बुजुर्ग व बीमार महिला है जोकि कोतवाली नगर स्थित देवपुरा स्थित त्रिकोणीय बिल्डिंग में अकेले निवास करती है। उसकी देख रेख के लिये यदा कदा उसका भांजा पुनित सोबती आता जाता रहता है। आरोप हैं कि उसके पडोस में रहने वाले दम्पति परिवार उसको अक्सर तंग व परेशान करते हुए गाली गलौच व मारपीट करते है।\

आरोप हैं कि कुछ दिन पूर्व पड़ोसी ने उसके साथ धक्का मुक्की करते हुए गाली गलौच करते हुए मारपीट करते हुए उसके टॉयलेट का दरवाजा तोड़ डाला। उसके विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। आरोप हैं कि पड़ोसी परिवार द्वारा ऐसे कृत्य किये जाते है जिससे उसकी लज्जा भंग होती है। उनके द्वारा पहने कपड़ो को भी फाड़ देते है। जिस कारण वह विचलित व सदमे में रहती है। उसके द्वारा घटना की सूचना थाने पर दी गई थी लेकिन पुलिस ने कोई कार्यवाही नही की।
पीडिता ने एसएसपी शिकायत प्रकोष्ठ में शिकायती पत्र 16 मई 23 को दिया, लेकिन उसपर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद पीडिता ने नगर मजिस्ट्रेट को भी एक शिकायती पत्र 31 मई 23 को दिया गया। वहां से भी पीडिता को निराशा हाथ लगी है। सवाल उठता हैं कि पीडिता द्वारा कप्तान व नगर मजिस्ट्रेट को शिकायती पत्र देने के बाद भी उसको न्याय नहीं मिल पा रहा हैं तो जाए तो जाए कहा की स्थिति बुजुर्ग-बीमार-लाचार पीडिता के सामने बनी हुई है।
