मुख्यमंत्री से मिलकर ज्ञापन सौपने जा रहे थे कर्मचारी
नगर मजिस्ट्रेट ने मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन खुद लिया
फरवरी माह का वेतन न मिलने से हैं कर्मचारी नाराज
कर्मचारियों ने आंदोलन की रूपरेखा तय कर लिया निर्णय
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। ऋषिकुल एवं गुरुकुल के कर्मचारियों ने पूर्व निर्धारित अपने आंदोलन कार्यक्रम के तहत ऋषिकुल राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में बैठक आयोजित की गयी। जिसमें अग्रिम आंदोलन की रणनीति बनाने के साथ-साथ ऋषिकुल आयुर्वेदिक काॅलेज में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचने वाले मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी मांगों के सम्बंध में ज्ञापन सौपने का निर्णय लिया गया। लेकिन प्रशासन को कर्मचारियों की रणनीति की जानकारी व उनमें आक्रोश को देखते हुए हड़कम्प मच गया। जिन्होंने कर्मचारी नेताओं से सम्पर्क साधा गया। जिसपर नगर मजिस्ट्रेट नूपुर वर्मा ने कर्मचारी नेताओं से सम्पर्क कर मुख्यमंत्री को सौपने वाले ज्ञापन को खुद लिया।
कर्मचारी नेता दिनेश लखेड़ा ने अफसोस व नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि चार दिन पूर्व कुलपति द्वारा कर्मचारियों को अश्वासन दिया था कि उनका फरवरी माह का वेतन दो दिन के भीतर मिल जाएगा, लेकिन आज तक कर्मचारियों को उनका फरवरी माह का वेतन नहीं मिल पाया है। जबकि मार्च माह समाप्ति की ओर है। कर्मचारियों के सब्र का इम्तिहान लिया जा रहा है। लेकिन अब कर्मचारियों का सब्र का बांध टूट चुका है। कहा कि कर्मचारी कैसे-कैसे कर अपने परिवार का गुजर बसर कर रहे है, उनका हाल वहीं जानते है। उनको अपना घर चलाना मुश्किल हो रहा हैं और उनके सामने कई समस्या भी खड़ी हो गयी है। कर्मचारियों में रोष के साथ-साथ आक्रोश भी है।
उन्होंने बताया कि कर्मचारियों ने अपनी मांगों के लिए आंदोलन करने का निर्णय लिया है। जिसमें कर्मचारी 22 व 23 मार्च को विरोध स्वरूप काली फीती बांधकर प्रदर्शन करेंगे। 24-25 मार्च को कर्मचारी अपनी उपस्थिति पंजिका में हस्ताक्षर कर 2 घंटे का कार्य बहिष्कार करते हुए धरना प्रदर्शन करेंगे और 27 मार्च को तीनों परिसरों के कर्मचारी सामूहिक सीएल लेकर आयुर्वेद विश्विद्यालय हर्रावाला देहरादून में धरना प्रदर्शन करते हुए अधिकारियों का घेराव करेंगे। उसी दिन अनिश्चित कालीन आंदोलन की घोषणा कर दी जाएगी।
इस अवसर पर अध्यक्ष के एन भट्ट ,समीर पांडेय, मेट्रन आंनदी शर्मा, उपाध्यक्ष सुनीता कोषध्यक्ष अनिल नेगी वरिष्ठ नेता रमेश चंद्र पंत, राजपाल सिंह तड़ियाल ने संयुक्त रूप से कहा कि कर्मचारियों का शोषण अब बर्दास्त के बाहर हो चुका है। अब आंदोलन ही विकल्प बचा है, अपने वेतन के लिए भी अधिकारियों से मान मंनोवल करनी पड़ रही है, अब आंदोलन होकर रहेगा।
चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा, जिला मंत्री राकेश भँवर, संयुक्त मंत्री मोहित मनोचा, उपशाखा गुरुकुल उपाध्यक्ष ताजबर सिंह, वरिष्ठ नेता जगजीत कैंतुरा नेगी, नर्सेस संवर्ग की स्मिता ,वंदना रतूड़ी ने सयुंक्त रूप से कहा कि कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है कि आप चुप रहे नही, तो आपके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।
कहा कि नेतागिरी नही करनी है, 1972 से ऋषिकुल, गुरुकुल राजकीय चिकित्सालय, कालेज के राजकीय कर्मचारियों को जबरदस्ती विश्वविद्यालय में जोड़ने का विरोध करते हुए पुनः इसे राजकीय घोषित करने की मांग के साथ-साथ पदोन्नति, गोल्डन कार्ड की सुविधा, समय पर वेतन दिया जाने की मांग को आंदोलन कार्यक्रम की घोषणा कर दी गयी हैं। 22 मार्च को प्रथम चरण में काली फीती बांधकर विरोध प्रदर्शन किया जायेगा।
इस असवर पर आंनदी शर्मा, सुनीता, स्मिता, केएन भट्ट, समीर पांडे, मनीष पंवार, प्रियंका, प्रवीण, ज्योति, रमेश चंद्र पन्त, प्रियंका विरलान,अनिल नेगी, अमित कुमार, जगजीत कैंतुरा, वंदना रतूड़ी, राजपाल सिंह, अमित कुमार, राकेश भँवर, विनोद, सुरेंद्र, मनोज पोखरियाल, ज्योति सिंह अमित कुमार लाम्बा, ममता पंवार सुनील तिवारी, मनीषा, प्रमोद, विमला, डोली, जोहर सिंह दानू,दिनेश लखेड़ा आदि शामिल रहे।
