चिकित्सकों ने जताई लेटर भी गिरने की आंशका
मोर्चरी में प्रवेश करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे चिकित्सक
सीएमओ डाॅ. दत्त मीडिया का फोन नहीं उठा रहे
बैनर देखकर मीडिया से बात करने के लग रहे आरोप
सीएमओ ने रूड़की में पोस्टमार्टम करने के दिये आदेशः सूत्र
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। तीर्थनगरी में शुक्रवार की देर शाम से हो रही लगातार बरसात से जिला अस्पताल की मोर्चरी की पिछली दीवार बीती रात ढह गयी। जिसके बाद चिकित्सकों का कहना हैं कि मोर्चरी की दीवारे व लेंटर झझर हालत में हैं, कभी भी ढह सकती है। जिसके बाद अस्पताल के चिकित्सकों पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में प्रवेश करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे है।
हरिद्वार में बीती देर शाम से लगातार बरसात हो रही हैं। जिससे जिला अस्पताल मोर्चरी की पिछली दीवार ढह गयी। जिला अस्पताल के पीएमएस डाॅ. सीपी त्रिपाठी ने बताया कि बरसात के कारण जिला अस्पताल की पिछली दीवार ढह गयी है। जिसके सम्बंध में सीएमओ डाॅ. मनीष दत्त को भी अवगत कराया गया है। जिन्होंने चिकित्सकों के साथ एक बैठक कर निर्णय लेकर उनको अवगत कराये। जिसके बाद कदम उठाया जाएगा, लेकिन साथ ही उन्होंने पोस्टमार्टम सिविल हाॅस्पिटल रूड़की में कराये जाने की बात कही है।
उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में रविवार को चिकित्सकों के साथ एक बैठक कर मोर्चरी के सम्बंध में गहन मंथन कर निर्णय लेकर सीएमओ को अवगत कराया जाएगा। उनके आदेश पर पोस्टमार्टम रूड़की में कराये जाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
चिकित्साधिकारी डाॅ. चंदन मिश्रा ने बताया कि पोस्टमार्टम रूड़की में होगा यह बात अलग है। लेकिन समस्या हैं कि सालों से मोर्चरी में रखे मृतकों के विसरा का क्या होगा? मौजूदा वक्त में मोर्चरी में एक हजार से अधिक मानव अंग के नामून (विसरा) रखे हुए है, आज की स्थिति में देखा जाए तो उनके पास विसरे के सम्बंध में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। सवाल यह पैदा होता हैं कि पोस्टमार्टम अगर रूड़की में होगा तो यह व्यवस्था कब तक चलेगी।
सूत्रों के अनुसार सीएमओ हरिद्वार डाॅ. मनीष दत्त ने फरमान जारी कर दिया हैं कि पोस्टमार्टम सोमवार से रूड़की में किये जाएगे। लेकिन इस बात की अभी तक अधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गयी है। तीर्थनगरी में बरसात का क्रम अभी भी लगातार जारी है।
सीएमओ हरिद्वार डाॅ. मनीष दत्त से सम्पर्क करने का प्रयास किया गया तो उनको फोन नहीं उठा। यह केवल इस मामले के सम्बंध में फोन करने की बात नहीं, बल्कि पूर्व में भी सीएमओ से फोन कर बात करने का प्रयास किया जा चुका है। लेकिन उनका फोन नही उठा। हाल ही में नवनियुक्त सीएमओ के सम्बंध में एक बात प्रचालित हैं कि सीएमओ मिलनसार व ईमानदार छवि के चिकित्सक है।
लेकिन यदि व्यवहारिकता की बात करे तो वह मीडियां के फोन बैनर देख उठाते है कि किस मीडिया से बात करनी हैं और किस से नहीं। जिससे उनकी व्यवहारिकता पर सवाल खड़े हो रहे है। एक कुशल अधिकारी वहीं हैं, तो समानता के साथ व्यवहार कर अपनी भूमिका निभाये।
