छात्रों के भविष्य से खिलवाड करते हुए उनसे मनमानी फीस वसूली जा रही
मा.उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन कराने में सरकार नाकाम साबित हो रही
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। भारतीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव प्रकाश जोशी ने कहा कि उत्तराखण्ड की निजी शैक्षणिक संस्थाओं मे माफिया राज बोलबाला है। जिसकारण अपने हित साधने लिए छात्रों के भविष्य से खिलवाड करते हुए उनसे मनमानी फीस वसूली जा रही है। जबकि निजी काॅलेजों में शुल्क निर्धारण के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के अनुरूप मा. उच्च न्यायालय के सेवा निवृत न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित शुल्क निर्धारण समिति एक्ट 2006 की सिफारिशों के बिना फीस में वृद्धि नहीं की जा सकती। लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा बढे हुए शुल्क का शासनदेश जारी कर निजी क्षेत्र के आयुर्वेदिक काॅलेजों की फीस में सीधे ही करीब तीन गुना यानि 80 हजार से बढा कर 2 लाख 15 हजार रूपये कर दी गयी है। इतना ही नहीं इस शुल्क के अलावा 35-40 हजार रूपये डेवलप्मेंट चार्ज एवं अन्य को जोडकर वसूला जा रहा है। श्री जोशी आज प्रेस क्लब हरिद्वार में पत्रकारों से रूबरू हो रहे थे। उन्होंने कहा कि कोई भी शासनादेश निर्गत होने की तिथि या अगली तिथि से लागू होता हैं ना कि पिछली तिथि से जबकि आयुष काॅलेजों द्वारा पूर्व मेंम प्रवेशित छात्रों पर पिछले सत्रों की गढी हुई फीस भी जमा करने का दबाव छात्रों पर डाला गया, जोकि पूर्णतः नियम विरूद्ध है। फीस वृद्धि के आदेशों को लेकर पूर्व प्रवेशित छात्र द्वारा मा. राज्यपाल उत्तराखण्ड से मिलकर अपनी बात रखी थी। लेकिन कोई समाधान न निकलने पर मजबूरन छात्रों को मा. उच्च न्यायालय के शरण में जाना पड़ा। उन्होंने बताया कि मा. उच्च न्यायालय नैनीताल द्वारा याचिका पर सुनवाई करते हुए 09 जुलाई 18 को उक्त शुल्क वृद्धि सम्बंधी शासनदेश को निरस्त करने के आदेश जारी करते हुए छात्रों से बढा कर लिया गया शुल्क 14 दिनों के भीतर वापस लौटाने के आदेश दिये थे। जिसके खिलाफ निजी काॅलेजों द्वारा पुर्नविचार याचिका दायर की गयी। लेकिन 09 अक्टूबर 18 को उच्च न्यायालय की खण्डपीठ ने एकलपीठ के आदेश को सही ठहराते हुए आदेश जारी किया गया। जिसके बाद राज्य सरकार द्वारा 02 नवम्बर 18, 22 मार्च 18 और 23 अप्रैल 18 को मा. उच्च न्यायालय के आदेशों के पालन के लिए आदेश जारी किये गये। लेकिन निजी आयुष काॅलेजों द्वारा उक्त आदेशों की अवहेलना कर दी गयी और शुल्क लौटाने से इंकार कर दिया गया। श्री जोशी ने बताया कि मा. उच्च न्यायालय की एकल पीठ एवं खण्ड पीठ के आदेशों की अवमानना के खिलाफ छात्रों द्वारा मा. न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की गयी है। जिसपर निजी काॅलेजों द्वारा न्यायालय को यह बताने पर कि उनके द्वारा न्यायालय में पुर्नविचार याचिका दाखिल, मा. उच्च न्यायालय द्वारा 23 सितम्बर 19 को पुन आदेश पारित किया गया कि न्यायालय में विचाराधीन पुर्नविचार याचिका होने से न्यायालय के पूर्व में पारित आदेशों की अवहेलना नहीं की जा सकती। इतना ही नहीं बीएएमएस का पाठ्यक्रम साढे चार वर्ष का निर्धारित हैं मगर छात्रों से पूरे पांच वर्ष का शुल्क वसूला जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन निजी आयुर्वेद काॅलेजों में से अधिकांश ऐसे काॅलेज भी हैं जोकि काॅलेजों के मानक पूरे नहीं हैं उसके बावजूद भी उनकी सम्बद्धता जारी है। इस बात की जानकारी भी लगी हैं कि इनमे से अधिकांश आयुष काॅलेजों ने विश्वविद्यालय को निर्धारित सम्बद्धता शुल्क भी कई वर्षो से जमा नहीं किया है। कांग्रेस पार्टी भी छात्रों की शुल्क वृद्धि रोकने की न्यायोचित मांग का समर्थन करती है। और सरकार से मांग करती हैं कि मा. उच्च न्यायालय के आदेशों का सख्ती से पालन करवाते हुए छात्रों से लिया गया बढा हुआ शुल्क लौटाया जाए। प्रेसवार्ता के दौरान अम्बरीश कुमार, पुरूषोत्तम शर्मा, डाॅ. संजय पालीवाल, अंजू द्विवेदी, राजीव चौधरी, रविश भटिजा, दीपक जखमोला आदि मौजूद थे।
