कॉलोनीवासियों की शिकायत पर एचआरडीए अधिकारियो की नींद टूटी
कॉलोनी में कई एचआरडीए कर्मियों का हैं निवास, उनपर खडे हो रहे सवाल
अवैध निर्माणाधीन इमारत पर एचआरडीए कर्मियों की आखिर नजर क्यों नही पड़ी ?
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। जिलाधिकारी/ उपाध्यक्ष हरिद्वार.रूड़की विकास प्राधिकरण विनय शंकर पाण्डेय के आदेशों के क्रम में हरिद्वार.रूड़की विकास प्राधिकरण द्वारा लगातार कई अवैध सम्पत्तियों को सील करने व अवैध निर्माण को ढहाने तथा अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त करने की कार्रवाई जारी है। उसी सिलसिले में गुरूवार को भी अवैध निर्माण/कालोनी को सील करने की कार्रवाई की गयी।
सचिव हरिद्वार.रूड़की विकास प्राधिकरण उत्तम सिंह चौहान ने बताया कि ग़ौरी शंकर सैनी द्वारा शिवलोक कॉलोनी, निकट कृष्णा डेरी हरिद्वार में किये गए तीन मंजिला अवैध निर्माण को सहायक अभियंता पंकज पाठक, क्षेत्रीय सुपरवाइजर व स्टाफ की टीम द्वारा सील करने की कार्रवाई की गयी।
जिलाधिकारी/उपाध्यक्ष एचआरडीए ने कहा है कि भविष्य में जो भी अवैध प्लाटिंग/अवैध निर्माण आदि में लिप्त पाये जायेगे, उनके खिलाफ इसी तरह नियमानुसार सख्त से सख्त कार्रवाई की जायेगी।
बताते चले कि इसी कॉलानी में एचआरडीए के कई कर्मी निवास करते हैं उसके बावजूद अवैध तरिके से तीन मंजिला इमारत खड़ी हो जाती हैं और एचआरडीए को भनक भी नहीं लगती। जबकि अवैध निर्माण दिनदहाड़े कॉलोनी के मुख्य मार्ग पर कराया जा रहा था, लेकिन इस अवैध निर्माणाधीन इमारत पर वहां रहने वाले एचआरडीए कर्मियों की नजर आखिर क्यों नहीं पड़ी ?। यह एक बड़ा सवाल खड़ा होता हैं।
जबकि एक छोटा से कोई निर्माण होता है तो एचआरडीए कर्मी व अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचकर उसका संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू कर देते हैं वो बात अलग हैं कि वह कार्यवाही कितनी आगे बढती हैं। जबकि शिवलोक कॉलोनी खुद एचआरडीए द्वारा विकसीत की गयी हैं और वहां पर इस तरह के अवैध निर्माण धड़ल्ले से किये जा रहे है। ऐसे अवैध निर्माण पर खुद एचआरडीए द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिए जा रहा। शिकायत पर ही एचआरडीए ना चाहते हुए कार्यवाही के लिए अपने कदम आगे बढता देखा जा रहा है।
एचआरडीए अधिकारियों द्वारा तीन मंजिला इमारत अवैध निर्माणाधीन थी, इसकी खुद पुष्टि एचआरडीए अधिकारियों ने इमारत को सील कर दी है। अब सवाल उन कर्मियों पर खड़ा होता हैं जोकि इस कॉलोनी में निवास करते हुए भी इस अवैध निर्माणाधीन इमारत पर नजर आखिर क्यों नहीं पड़ी?। बताया जा रहा हैं कि कॉलोनीवासियों की शिकायत पर एचआरडीए की नींद टूटती है।
