हजारों की नगदी, मोबाइल, कम्प्यूटर, प्रिंटर आदि बरामद
गिरोह के चार सदस्य फरार, सरगर्मी से तलाश में जारी
ड्रिस्ट्रिक कोर्ट, इंनकम टैक्स आदि के किये नियुक्ति पत्र जारी
सरकारी विभागों में अलग-अलग पदों के रेट थे निर्धारित
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। बेरोजगारों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी भर्ती सेंटर का खुलासा करते हुए लक्सर पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्रतार किया है। पुलिस टीम ने सेंटर से फर्जी नियुक्ति प्रमाण पत्र, भारी मात्रा में अभ्यर्थियों की शैक्षिक अंकतालिकायें, एक दर्जन से अधिक चैक बुक, पास बुक, साठ हजार की नगदी, 06 मोबाइल फोन, कम्प्यूटर, प्रिंटर आदि बरामद किये है। जिनके द्वारा बड़े स्तर पर उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश में अपना नैट वर्क चलाया जा रहा था।
जिनका मुख्य कार्यालय दिल्ली और स्थानीय कार्यालय कनखल में बनाया हुआ था। जिन्होंने दर्जनों युवाओं को अपनी ठगी का शिकार बनाकर लाखों हड़प चुके है। जिनके खिलाफ उत्तराखण्ड समेत यूपी के अलग-अलग थानों में धोखाधड़ी के कई मुकदमें दर्ज है। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने फरार चार अन्य साथियों के नामों का खुलासा किया है। जिनकी पुलिस सरगर्मी से तलाश में जुटी है। इस बात की जानकारी एसएसपी अजय सिंह ने रोशनाबाद पुलिस कार्यालय सभागार में पत्रकार वार्ता के दौरान दी।

उन्होंने बताया कि बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी कर लाखों हड़पने के मामले संज्ञान में आने के बाद उनके द्वारा अधीनस्थों को फर्जी भर्ती सेंटर चलाने वाले ठगों को शीघ्र गिरफ्रतार करने के निर्देश दिये गये थे। ठगों तक पहुंचने के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गयी। जिनको फर्जी भर्ती सेंटर संचालित करने वाले गिरोह को दबोचने के लिए अलग-अलग जिम्मेदारी सौपी गयी। पुलिस टीम ने पीडितों से जानकारी जुटाते हुए गिरोह को दबोचने के लिए आगे बढती गयी। पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर गिरोह अखबारों में विज्ञप्ति निकालते थे।
गिरोह बकायदा एक चैनल कम्युनिटी हेल्थ वर्कर एवं महिला कल्याण ट्रस्ट नई दिल्ली बनाया गया था। जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में तथा उसकी शाखा लखनऊ से संचालित होती थी, तथाकथित ट्रस्ट की एक शाखा कनखल में बनाई हुई थी। बेरोजगार युवाओं के आवेदन मिलने पर उन्हें लखनऊ स्थित नामी होटल में इंटरव्यू और पेपर के लिए बुलाया जाता था। जहां पर युवाओं को सरकारी विभागों में पद के हिसाब से लाखों रूपये लेकर उनको फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया जाता था।
एसएसपी ने बताया कि जब युवा नियुक्ति पत्र को लेकर विभाग में पहुंचता था तब जाकर उनको फर्जी नियुक्ति पत्र जारी होने की जानकारी मिलती थी। जिसके सम्बंध में जनपद हरिद्वार के विभिन्न थानों रुडकी, लक्सर, गंगनहर, ज्वालापुर में मिली धोखाधडी के मुकदमें दर्ज कराये जा चुके है। पुलिस टीम ने गिरोह को दबोचने के लिए मुखबिरों की भी मदद ली जा रही थी।
पुलिस सर्विलांस के आधार पर गिरोह तक पहुंचने का प्रयास कर रही थी कि इसी दौरान पुलिस को फर्जी भर्ती सेंटर के सम्बंध में अहम सूचना मिली। जिसपर पुलिस टीम ने लक्सर में ही बताये गये स्थान पर छापा मारकर सेंटर से गिरोह के चार सदस्यों को दबोच लिया। पुलिस टीम ने मौके से अभ्यर्थियों की शैक्षिक अंकतालिकायें, एक दर्जन से अधिक चैक बुक, पास बुक, साठ हजार की नगदी, 06 मोबाइल फोन, कम्प्यूटर, प्रिंटर आदि बरामद किये।
उन्होंने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपना नाम कादिर पुत्र शहीद हसन निवासी जैतपुर लक्सर हरिद्वार, दिनेश डोगरा निवासी सुल्तानपुर लक्सर हरिद्वार, खुर्शीद आलम चिश्ती पुत्र मकसूद निवासी बंदा रोड रुडकी और सौरभ पुत्र रेशम सिंह निवासी लोधीवाला थाना झबरेडा हरिद्वार बताते हुए खुलासा किया कि उनके द्वारा जिला कलेक्ट्रेट, ड्रिस्ट्रिक कोर्ट, उपभोक्ता न्यायालय, इंनकम टैक्स विभाग, ओर्डनेंस फैक्टरी देहरादून में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों लेकर फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कर चुके है। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर प्रत्येक पद के रेट तय किये गये थे। गिरोह द्वारा चपरासी के पद के लिए 05 लाख, क्लर्क के लिए 08 लाख, कार्यालय सहायक के लिए 10 लाख रूपये तय की गयी थी रकम।
उन्होंने बताया कि आरोपियों ने इस खेल में फरार अपने चार अन्य साथियों के नामों का भी खुलासा किया। जिनमें विजय श्रीवास्तव निवासी लखनऊ यूपी, हर्ष श्रीवास्तव निवासी लखनऊ यूपी, रिजवान पुत्र शहीद हसन निवासी जैतपुर लक्सर हरिद्वार और सारिका बानो पत्नी अब्दुल कादिर निवासी जैतपुर लक्सर हरिद्वार का शामिल है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सम्बंधित धाराओं में मामला दर्ज करते हुए मेडिकल के बाद न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया।
प्रेसवार्ता के दौरान एसपी देहात स्वप्न किशोर सिंह, एसपी क्राइम श्रीमती रेखा यादव, सीओ लक्सर विवेक कुमार आदि मौजूद रहे।
