डॉ. पाण्डय की टिप्पणी ने उनके संतत्व पर ही सवाल खड़े किये
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। संतों व धर्मोचार्यो का इस्तेमाल संघ व भाजपा राजनीति लाभ उठाने का प्रयास कर रही है। गैर राजनीति के नाम पर ऐसा खेल खेला जा रहा हैं जोकि समाज व देशहित में नहीं है। जिसका जिता जागता उदाहरण बीते दिन कनखल के एक आश्रम में आचार्यो की बैठक के माध्यम से राजनीति लाभ लेने की कौशिश की गयी। इस बात की जानकारी देते हुए पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ काग्रेंसी नेता अम्बरीष कुमार आज प्रेस क्लब हरिद्वार में पत्रकारों से रू-ब-रू हो रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार संघ व भाजपा ने कनखल के एक आश्रम में संतों व धर्मोचार्यो का इस्तेमाल का प्रयास निंदनीय है। शांतिकुंज के प्रमुख डॉ. प्रणव पाण्डया के उस बयान पर आपत्ति जताते हुए अम्बरीष कुमार ने कहा कि बिना संन्यास लिए कोई संत कैसे बन सकता है। आज डॉ. पाण्डय जी यह बताए कि उन्होंने कब सन्यास लिया। वो दिन भूल गये जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी और उनके एक बडे आयोजन के दौरान भगदड के दौरान कई लोगों की मौत हुई थी। जिसके लिए शांतिकुंज की व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया जा रहा था। तब प्रदेश के कांग्रेसी मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उनको जेल जाने से बचाया था। लेकिन आज प्रणव पाण्डया भाजपा को खुश करने के लिए काग्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के सम्बंध् में ऐसा घटिया बयान दे रहे है। जोकि घोर निंदनीय व आपत्तिजनक है। उन्होंने कहा कि शांतिकुंज के संस्थापक श्रीराम आचार्य जी जो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने के साथ-साथ कांग्रेस विचारधारा में रचे बसे थे, उनकी विरासत पाकर नाम, प्रसिद्धि मिली को भी अपमानित कर नाकार दिया। डॉ. पाण्डय की टिप्पणी अत्यंत खेदजनक, आपत्तिजनक, निदंनीय है। संत का पहला गुण विनम्रता हैं, परन्तु उनकी अंहकारी टिप्पणी से उनके संतत्व पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। उन्होंने कहा कि संघ का दोगला चरित्र रहा हैं कि वह अपने को राजनीति से दूर रखने की बात करता हैं और भारतीय संस्कृति तक ही सीमित रहने का दावा करता है। लेकिन सच्चाई इससे कोसों दूर है। सर्वविदित हैं कि संघ का सीधे-सीधे राजनीति में दखल है। भाजपा में कौन शीर्ष पद पर रहेगा और भाजपा सरकार में कोई मुख्यमंत्री व मंत्री बनेगा। इस बात का फैसला संघ करता है। प्रेसवार्ता के दौरान पूर्व पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रहा्रचारी, अरविन्द शर्मा, धर्मपाल ठेकेदार, मुरली मनोहर, बलराम राठौर, नीरज साहू आदि नेता मौजूद थे।
