♦नियमों को ताक पर रखकर अनन-फनन में किये गये चिकित्सकों के स्थानान्तरण
♦चिकित्सकों के स्थानान्तरण में दम्पति नीति और मानवीय पहलुओं को भी किया दर किनार
♦चिकित्सकों में भारी रोष, प्रांतीय चिकित्सक सेवा संघ ने भी जताई नाराजगी
♦प्रांतीय चिकित्सक सेवा संघ के पदाधिकारियों ने किया देहरादून कूच
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। उत्तराखण्ड स्वास्थ्य विभाग में हुए चिकित्सकों के स्थानान्तरण को लेकर सवाल उठने लगे है। चिकित्सकों की माने तो उत्तराखण्ड की स्थानान्तरण नियमों को ताक पर रखकर अनन-फनन में चिकित्सकों के स्थानान्तरण किये गये है। स्थानान्तरण में मानवीय पहलुओं को भी दरकिनार किया गया है। शासन द्वारा जारी स्थानान्तरण लिस्ट से चिकित्सकों में भारी रोष देखा जा रहा है।
बताया जा रहा हैं कि स्थानान्तरण में नियमों के विपरीत चिकित्सकों के स्थानान्तरण किये गये है। चिकित्सकों के अनुसार नियमानुसार अगर चिकित्सक दम्पति एक ही स्थान पर हैं तो उनको स्थानान्तरण एक ही स्थान या फिर एक ही जगह किया जा सकता है, लेकिन जारी लिस्ट में ऐसा नहीं हैं। अगर स्थानान्तरण लिस्ट का अवलोकन किया जाए तो उत्तराखण्ड स्वास्थ्य विभाग द्वारा किये गये स्थानान्तरण में भारी खामिया देखी जा सकती है।
उत्तराखण्ड स्वास्थ्य विभाग द्वारा किये गये चिकित्सकों के स्थानान्तरण से नाराज नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि अगर स्थानान्तरण नियमों की बात करें तो 55 वर्ष से अधिक उम्र के चिकित्सकों को स्थानान्तरण नीति में छुट दी जाती हैं। यदि किसी चिकित्सक के परिवार का सदस्य जोकि गम्भीर बीमारी से ग्रस्त हैं और चिकित्सक पर निर्भर हैं, उसको मानवीय आधार पर स्थानान्तरण में राहत दी जाती है। शासन द्वारा जारी स्थानान्तरण लिस्ट में दम्पति नीति को भी दर किनार किया गया है। शासन की ओर से स्थानान्तरण कर कई ऐसे वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सकों को जनता से दूर कर कार्यालयों में बैठा दिया गया है।
अगर हरिद्वार की बात करेें तो हरिद्वार के कई वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा प्रदेश के विभिन्न जनपदों में दी गई कई वर्षो की सेवाएं और उनका अनुभवों को भी दरकिनार कर उनको ऐसे स्थलों पर भेजा गया है। जहां पर उनके अनुभवों का लाभ अब प्रदेश की जनता को नहीं मिल सकेगा। हरिद्वार में दो रेडियोलोजिस्टों को भी जनता से दूर करने का प्रयास किया गया है। जिनके स्थान पर किसी भी रेडियोलोजिस्ट को तैनाती नहीं दी गई है। जिनके स्थानान्तरण हो जाने के बाद हरिद्वार की जनता को एक्सरे और अल्ट्रासाउंड के लिए अब निजी हॉस्पिटलों का रूख करने के लिए मजबूर होना पडेगा।
उत्तराखण्ड सरकार द्वारा हरिद्वार में होने जा रहे कुंभ-2027 को दिव्य, भव्य और सुरक्षित आयोजित करने को प्रचारित किया जा रहा है। वहीं श्रावण मास का भारी भरकम कांवड मेला भी सिर पर है। जिनको सकुशल व सुरक्षित सम्पन्न कराने की अहम जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के कंधों पर होती है। ऐसे में शासन द्वारा किये गये वरिष्ठ चिकित्सकों के स्थानान्तरण के चलते कांवड मेला और कुंभ मेला स्वास्थ्य विभाग कैसे सम्पन्न करा पायेगा, यह बडा सवाल खडा हो चला है। सवाल उठता हैं कि क्या शासन कांवड मेला और कुंभ मेला नये चिकित्सकों के भरोसे कैसे सकुशल सम्पन्न कराने में कामयाब हो पायेगा ? जबकि हरिद्वार पहुंचने वाले चिकित्सकों को भारी भरकम मेले को सकुशल सम्पन्न कराने का कोई अनुभव तक नहीं है।
उत्तराखण्ड स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सकों के स्थानान्तरण किये जाने को लेकर प्रांतीय चिकित्सक सेवा संघ भी अपनी नाराजगी भी जता चुका है। बताया जा रहा हैं कि नियमों के विपरीत किये गये स्थानान्तरण से नाराज प्रांतीय चिकित्सक सेवा संघ के पदाधिकारी कई चिकित्सकों के साथ देहरादून कूच कर गये। जोकि किये गये स्थानान्तरण को लेकर उनका एक प्रतिनिधि मण्डल डीजी हैल्थ और स्वास्थ्य सचिव से मुलाकात कर सकते है। देखना होगा कि उत्तराखण्ड स्वास्थ्य विभाग द्वारा किये गये चिकित्सकों के स्थानान्तरण को लेकर चिकित्सकों की नाराजगी किस स्तर तक जा पायेगी, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा।
