♦अल्ट्रासाउड कराने वाले मरीजों को निजी हॉस्पिटल की ओर करना पड रहा रूख
♦मारपीट व दुर्घटना में घायल मरीजों को मेडिकल के लिए किया जा रहा रेफर
♦एक्स-रे टेक्निशियन को रेफर होने वाले मरीजों का झेलना पड रहा गुस्सा
♦मंत्री जी से शिकायत करने व पत्रकारों को बुलाने की दी जा रही धमकी
♦स्वास्थ्य विभाग हरिद्वार की उदासीनता को लेकर स्थानीय लोगों में भारी रोष
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। जिला और उप जिला मेला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक ना होने से स्थानीय लोेगों समेत मेडिकल बनवाने वाले मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों को अल्ट्रासाउड कराने के लिए निजी हॉस्पिटल की ओर रूख करना पड़ रहा है। वहीं मारपीट व दुर्घटना में घायल लोगों को भी रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक ना होने पर मेडिकल बनवाने के लिए उनको एक्स-रे के लिए दून मेडिकल कॉलेज देहरादून या फिर एम्स ऋषिकेश रेफर होना पड रहा है।
बताया जा रहा हैं कि रेफर होने पर मारपीट व दुर्घटना में घायल मरीजों व उनके तीमारदारों के गुस्से का सामना उप जिला मेला अस्पताल में तैनात एक्स-रे टेक्निशियन समेत स्टॉफ को होना पड रहा है। जिसकी जानकारी स्थानीय स्वास्थ्य विभाग हरिद्वार को होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक की नियुक्ति कराने के सम्बंध में कोई ठोस कार्यवाही नही की जा रही है। जिसको लेकर शहर के नागरिकों में स्वास्थ्य विभाग की लोगों के उपचार में उदासीनता को लेकर भारी रोष व्याप्त है।
बताते चले कि शासन की ओर से जिला अस्पताल हरिद्वार में रेडियोलॉजिस्ट पद पर तैनात डॉ. मनीष दत्त को कुंभ स्वास्थ्य विभाग मेलाधिकारी बनाये जाने पर उनके स्थान पर शासन के द्वारा किसी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती ना करने पर वहां पर रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक का पद रिक्त चला आ रहा है। वहीं उप जिला मेला अस्पताल में तैनात सीएमएस एवं रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक डॉ. राजेश गुप्ता को जिला मेला अस्पताल का पीएमएस बनाये जाने के बाद उप जिला मेला अस्पताल में भी रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक की तैनाती ना होने पर वहां पर भी रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक का पद रिक्त चला आ रहा है।
जिला और उप जिला मेला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक की तैनाती ना होने पर शहर के लोगों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए निजी हॉस्पिटल का रूख करना पड रहा है। वहीं मारपीट व दुर्घटना में घायल मरीजों को एमएलवीसी यानि मेडिकल बनवाने के लिए दून मेडिकल कॉलेज देहरादून या फिर एम्स ऋषिकेश रेफर होना पड रहा है। बता दें कि मारपीट मामले या फिर दुर्घटना में घायल मरीजों को उपचार के लिए उप जिला मेला अस्पताल की इमरजेंसी ले जाया जाता है।
जहां पर उनका उपचार तो किया जाता हैं, लेकिन जब ईएमओ यानि इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर द्वारा घायल के एक्स-रे करवाने की आवश्यकता महसूस की जाती हैं और उनको एक्स-रे के लिख दिया जाता है। जब घायल के तीमारदार उसको लेकर एक्स-रे करवाने के लिए उप जिला मेला अस्पताल में एक्स-रे के लिए पहुंचते हैं तो उनको जबाब मिलता हैं कि मेडिकल के लिए एक्स-रे दून मेडिकल कॉलेज देहरादून या फिर एक्स ऋषिकेश में होगा। जब घायल के तीमारदार कहते हैं कि उनको एक्स-रे उप जिला मेला अस्पताल की इमरजेंसी के चिकित्सक ने लिखा हैं, तो एक्स-रे भी यहीं होगा।
इसी बात को लेकर रेफर होने से गुस्साए मरीज के तीमारदारों का एक्स-रे टेक्निशियन और वहां पर मौजूद स्टॉफ पर गुस्सा फूट पडता है। अमूमन देखा गया हैं कि घायल या उसके तीमारदार एक्स-रे टेक्निशियन और वहां पर मौजूद स्टॉफ को मंत्री जी से शिकायत करने तथा पत्रकार बुलाने की धमकी दी जाती है। जिसके सम्बंध में एक्स-रे टेक्निशियन द्वारा लिखित में उप जिला मेला अस्पताल के चिकित्साधिकारी को लिखित में शिकायत करने पर भी कोई सार्थक नतीजा नहीं निकल पा रहा है। जिसको लेकर एक्स-रे टेक्निशियन और वहां पर तैनात स्टॉफ अपने ही अधिकारियों के उदासीन रवैये को लेकर निराश व हताश देखे जा रहे है।
