संघ ने लगाया अपने साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप
आरोपः उत्तराखण्ड में दो-दो कानून लागू किये जा रहे
कर्मियों को आंदोलन के लिए किया जा कर रहा मजबूर
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएँ उत्तराखंड में मुख्यमंत्री के आदेशों के बाद भी आज तक चिकित्सा स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा में आज तक कोई पदोन्नति नही किये जाने से कर्मचारियों में आक्रोश है। इस संबंध में कर्मचारियों की मांगों के निस्तारण के लिए स्वास्थ्य मंत्री को कर्मचारियों की पदोन्नति एवं पौष्टिक आहार भत्ता दिए जाने हेतु संघ द्वारा हस्तक्षेप करने तथा शासन से पदोन्नति वाले मामले में अनुरोध कर ज्ञापन भेजा गया है। कर्मचारी संघ अपनी मांगों को लेकर शीघ्र ही एक प्रतिनिधि मण्डल स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर अपनी मांगों से अवगत करायेगा।
प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा, प्रदेश महामंत्री सुनील अधिकारी, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष गिरीश पंत, प्रदेश उपाध्यक्ष नेलसन अरोड़ा ने संयुक्त रूप कहा कि कर्मचारियों की मांगों पर न तो महानिदेशालय और न ही शासन ध्यान दे रहा है, एक प्रदेश में दो-दो कानून लागू किये जा रहे हैं। पशुपालन विभाग द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की वेक्सीनेटर के पद पर पदोन्नति कर दी गयी। जिसमंे 296 पद स्वीकृत किये गए और उद्यान विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को उद्यान सहायक बना दिया गया। उनको टेक्निकल घोषित करते हुए उनका ग्रेड पे 4200 कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि जबकि स्वास्थ्य विभाग के सभी कर्मचारी अन्य विभागों के चतुर्थ श्रेणी कर्मियों से उनका कार्य भिन्न है। कोरोना काल में चतुर्थ श्रेणी कर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना रोगियों की सेवा की, ऑक्सीजन गैस प्लांट में कार्य किया। ओटी में स्टरलाइजेशन, वार्ड में ड्रेसिंग, मरीज की बोतल बदली, जरूरत पड़ने पर टांके लगाना, ब्लड बैंक लेब में टेक्निकल कार्य करना, सफाई सेवक पोस्टमार्टम में चिकित्सक के निर्देशानुसार चिर फाड़ का कार्य किया गया। लेकिन उसके बावजूद न तो हमारी पदोन्नति, न ही हमको टेक्निकल किया गया और उद्यान विभाग के माली टेक्निकल हो गए, रोगियों की सेवा करने वाले कर्मचारी हर तरह से वंचित हैं, जोकि अन्यायपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि महानिदेशक से तीन बार समझौता होने के बाद भी आज तक स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति नहीं की गयी है, जबकि मुख्यमंत्री के सख्त आदेश होने के बाद भी आज तक पदोन्नति नही हो पाई है, जोकि दुःखद और चिन्तनीय है। संघ को आंदोलन जैसी स्थिति करने हेतु बाध्य किया जा रहा है।
जिलाध्यक्ष गुरुप्रसाद गोदियाल, जिला मंत्री त्रिभुवन पाल, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य राजेन्द्र तेश्वर, जिला मंत्री हरिद्वार राकेश भँवर ने संयुक्त रूप से कहा कि नर्सेस संवर्ग को कई वर्षों से पौष्टिक आहार भत्ता मरीजो के संपर्क में रहने के कारण दिया जा रहा है, जबकि चतुर्थ श्रेणी कर्मी वार्ड बॉय, वार्ड आया, सफाई सेवक, चैकीदार अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मी नर्सेस संवर्ग से ज्यादा मरीजों के संपर्क में रहते हैं। किंतु उनको आज तक पौष्टिक आहार भत्ता नही दिया जाना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता है, जो भेदभाव की नीति को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि सबसे छोटे संवर्ग के साथ अन्याय पूर्ण रवैया है। जिन चतुर्थ श्रेणी कर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना कोरोना में अपनी सेवाएं दी, उनको आज तक प्रोहत्साहन भत्ता नही मिला और समस्त उत्तराखंड के चिकित्सा अधिकारियों को 10 हजार प्रोहत्साहन भत्ता दिया जाना सरासर भेदभाव दर्शाता है, जोकि किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं किया जायेगा, जल्द ही प्रदेश स्तर पर बैठक कर अग्रिम रणनीति बनाई जाएगी।
