ओएसटी सेंटर में सिरिज से नशा लेने वालों के आंकड़े पंजीकृत
नशे की लत छुड़ाने के लिए ओएसटी सेंटर से दी जा रही निःशुल्क दवा
सेंटर से मिलने वाली दवा मेडिकल स्टोरों पर बेचना प्रतिबंधित
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। शासन के निर्देश पर प्रदेशभर में वृहद स्तर पर नशा मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है। जिसके चलते पुलिस प्रशासन अभियान को लेकर बेहद गम्भीर है। जिसको लेकर नशा सौदागरों पर शिंकजा कंसते हुए लगातार ताबड़तोड़ छापेमारी कर धरपकड़ की जा रही है। यदि हम अकेले हरिद्वार जनपद की बात करेें तो आपको जानकर हैरानी होगी कि यहां पर सिरिंज से नशा लेने वाले लोगों की सख्या 473 है।

यह आकंड़े अपने आप में चौकाने वाले हैं, यह हम नहीं कह रहे, बल्कि टीबी हॉस्पिटल में चल रहे सरकारी ओपीओएड प्रतिस्थापन थैरेपी यानि ओएसटी कार्यालय में पंजीकृत संख्या है। इसके अलावा स्मैक, गांजा, सुल्फा और शराब समेत अन्य माध्यमों से नशा करने वाले अलग है। जिनके आंकड़े किसी के पास नहीं है। इन्हीं आंकड़ों से अदांजा जगाया जा सकता हैं कि जनपद हरिद्वार में नशे का कारोबार किस हद तक अपनी जड़े मजबूत कर चुका है।
दुनियाभर में तीर्थनगरी के रूप में विख्यात हरिद्वार धर्मनगरी के युवाओं व लोगों को इनदिनों नशे ने अपनी गिरफ्रत में ले लिया है। बताया जा रहा हैं कि नशे की गिरफ्रत में केवल युवा ही नहीं बल्कि महिलाए व नाबालिग भी इसकी जकड़ में है। जिसको लेकर समय-समय पर समाजिक संगठनों द्वारा पुलिस प्रशासन के खिलाफ नशे के कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए धरना प्रदर्शन किये जाते रहे है। लेकिन उसके बावजूद तीर्थनगरी में फल फूल रहे नशे का कारोबार कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसा नहीं पुलिस प्रशासन नशे के सौदागरों के खिलाफ कार्यवाही नहीं कर रहा। पुलिस प्रशासन नशे सौदागरों को दबोच कर उनकी रीड तोड़ने की कौशिश में लगी है। मगर उसके बावजूद नशे केे करोबार पर अकंुश लगता नजर नहीं आ रहा है।
हरिद्वार तीर्थनगरी में नशे के कारोबार के पीछे सफेद पोश लोगों के सरंक्षण देने का आरोप भी समय-समय पर लगते रहे है। अगर हम हरिद्वार जनपद में केन्द्र सरकार द्वारा संचालित ओपीओएड प्रतिस्थपन थैरेपी यानि ओएसटी सेंटर की बात करें तो सेंटर के माध्यम से सिरिंज से नशा लेने वाले लोगों को सही राह पर लाने और उनका भविष्य सुनिश्चित करने के लिए उनको नशे की लत से छुटकारा दिलाने के लिए निःशुल्क दवा वितरित की जा रही है।
केन्द्र सरकार द्वारा स्थापित ओएसटी सेंटर संचालित करने के पीछे खास वजह यह भी बताई जा रही हैं कि एचआईवी संक्रमण की रोकथाम करना है। अक्सर एचआईवी संक्रमण की अहम वजह एक ही सिरिंज से कई लोगों द्वारा नशा लेना पाया गया है। हरिद्वार जनपद में ओएसटी सेंटर टीबी हॉस्पिटल हरिद्वार में स्थापित है। जहां पर अब तक सिरिंज से नशा लेने वाले 473 लोग पंजीकृत है। बताया जा रहा हैं कि जिनमें 49 लोगों की मौत हो चुकी हैं और 71 लोग किन्हीं कारणों के चलते दवा लेने नहीं पहुंच रहे है।
यदि हम ओएसटी सेंटर चिकित्साधिकारी डॉ. शादाब सिद्धकी की माने तो मौजूदा वक्त में अभी भी 473 लोग सिरिंज से नशा लेने वाले सेंटर में पंजीकृत है। जिनको नियमित रूप से ओएसटी सेंटर से दवा खुद खिलवाई जा रही है। ये सिरिंज से नशा लेेने वाले लोगों के आंकडे है। लेकिन इसके अलावा स्मैक, गांजा, सुल्फा और शराब समेत अन्य माध्यमों से नशा करने वाले अलग है। इनकी संख्या का कोई अनुमान नहीं है।
ओएसटी सेंटर नोडल अधिकारी व क्षय रोग चिकित्सक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि केन्द्र सरकार की ओर से एचआईवी संक्रमण को रोकने के लिए सिरिंज से नशा लेने वाले लोगों का नशे की लत को खत्म करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। ओएसटी सेंटर से सिरिंज के द्वारा नशा लेने वाले लोगों को निशुल्क दवा अपने सामने ही खिलवाई जाती है। जो दवा सेंटर में उपलब्ध हैं वह आम मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध नहीं होती, यह माना जाए की सेंटर से मिलने वाली दवा मेडिकल स्टोर पर बेचना प्रतिबंधित है।
टीबी हॉस्पिटल व ओएसटी सेंटर चिकित्साधिकारी डॉ. शादाब सिद्धकी ने बताया कि ओएसटी सेंटर में सिरिंज से नशा लेने वाले 473 लोग पंजीकृत है। जिनमें 49 की मृत्यु हो चुकी हैं और 71 लोग किन्हीं कारणों से दवा लेने नहीं पहुंच रहे है। यदि 120 लोगों को कम किया जाए तो मौजूदा वक्त में 353 नशे से पीडितों को सही राह पर लाने और उन का भविष्य सुधाने के लिए सेंटर उनको निःशुल्क दवा दे रहा है।
ओएसटी सेंटर में पिछले तीन माह यानि 17 मई से 15 अगस्त 22 तक दवा आपूर्ति बंद थी। जिसकारण लोगों को प्रतिदिन दवा का वितरण प्रभावित हुआ। ओएसटी सेंटर में 16 अगस्त 22 से दवा की आपूर्ति शुरू हो गयी है। जिसके बाद करीब 75 लोग दवा लेने पहुंच रहे है। यह वो लोग हैं जिन मोबाइल नम्बर उनके पास उपलब्ध थे और उनको दवा आने की जानकारी दी गयी थी। सिरिंज से नशा लेने का कोर्स 6 माह से 1 साल का होता है जिसको पूरा करने के बाद नशे के लत छुट जाती है।
