वाल्मीकि समाज का आरक्षण अलग करने की मांग
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। आदि धर्म समाज आघस भारत के प्रमुख दर्शन रत्न रावण ने कहा कि हनुमान या राम को भी दलित बता सकते हैं योगी जी मगर इससे दलितोें का भला होने वाला नहीं है, अब हम ऐसे जुमलो या नारो के बहकावे में आने वाले नहीं। प्रमुख दर्शन रत्न रावण आज प्रेस क्लब हरिद्वार में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दलितो में महा दलित वाल्मीकि समाज की बहुत समस्याए है। जिन्हें सरकारेे निरन्तर टालती चली आ रही है। इनमें सब से बड़ी समस्या और मांग हैं अलग आरक्षण की। वर्ष 2019 के चुनाव में वाल्मीकि समाज का सबसे बड़ा मुद्दा होगा कि हमारा आरक्षण में हिस्सा अलग से दिया जाए। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तब मुख्यमंत्री हरीश रावत खुद पावन वाल्मीकि तीर्थ सीतावनी गये थे। और वाल्मीकि तीर्थ के सौंदर्यकरण तथा जनसुविधाओं की कई योजनाएं घोषित की गयी थी। लेकिन वर्तमान सारकार को राम के अलावा कोई याद ही नहीं। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि उत्तराखण्ड सरकार शीघ्र ही पावन वाल्मीकि तीर्थ सीतावनी की तरफ ध्यान दे और वाल्मीकि समाज का आरक्षण अलग करे, ताकि सबसे वंचित समाज को आरक्षण का सही से लाभ मिल सकें। शिक्षा में द्रोणाचार्य नीति को बनाये रखने के लिए तमाम राजनीति दल शिक्षा का निजीकरण कर रहे है। लेकिन निजी शिक्षण संस्थानों में मनचाही फीस वसूली जा रही है। जिसका सीध असर हमारे गरीब दलित आदिवासी पर पड़ता है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाए निजी हाथों से मुक्त करायी जाए। हनुमान मन्दिरों पर दलितों के द्वारा कब्जा लेने या मांगने के सवाल पर रावण जी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमारे बच्चों को स्कूल व काॅलेज की जरूरत है, ना की मन्दिरों के भिखारी बनने की, कुछ लोग वाल्मीकि समाज को गुमराह कर रहे है। प्रेसवार्ता के दौरान अनूज कागड़ा, नरेन्द्र कागड़ा, नरेश तेश्वर, आशू चंचल, विजेन्द्र, कैलाश आदि मौजूद थे।
