

भगवान श्रीराम विश्व में आस्था के शिखर पर विराजमान हैंः जगद्गुरू रामानन्दाचार्य हंसदेवाचार्य
अशोक वर्मा/ हरीश संतवानी
हरिद्वार। मंगलमय परिवार द्वारा श्री प्रेम नगर आश्रम में आयोजित श्रीरामकथा का शुभारम्भ श्रीमद्जगद्गुरू रामानन्दाचार्य हंसदेवाचार्य महाराज के सांनिध्य में मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक एवं निर्वाणी अखाडा के श्रीमहन्त रवीन्द्र पुरी महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि श्रीरामकथा के अवसर पर उपस्थित होना मेरा परम सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि श्रीरामकथा आनन्द का परम धाम है जो इस कथा को श्रवण करेगा वो हमेशा जीवन में सफलता और आनन्द को ही प्राप्त करेगा। उन्होंने कहा कि श्री कौशल महाराज श्रीरामकथा कहने की शैली अद्भुत है जो मन को ईश्वर की तरफ स्वतः ही खींच ले जाती है। हरिद्वार जैसे पावन तीर्थ में श्रीरामकथा का रसपान करना अत्यन्त पुण्यदायक है। महाराज जी कथा में राष्ट्रदर्शन झलकता है। आयोजन समिति के सदस्य इस प्रकार का आयोजन करने पर बधाई के पात्र हैं। जगद्गुरू रामानन्दाचार्य हंसदेवाचार्य महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम विश्व में आस्था के शिखर पर विराजमान हैं। उन्हें मर्यादा पुरूषोत्तम की संज्ञा दी गयी है। श्रीराम के जीवन को त्याग, बलिदान, करूणा, भक्तवत्सल, प्रजावत्सल एवं कल्याणकारी शासक के रूप में पहचाना जाता है। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को भगवान श्रीराम के चरित्र से प्रेरणा लेकर आदर्श पुरूष की भांति जीवन व्यतीत करना चाहिए। संत विजय कौशल सनातन परम्परा को मध्य में रखकर कथा करतेे हैं। कथा उसी को सुनने को मिलती है जिस पर भगवान श्रीराम की कृपा होती है। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सरकारी आयोजनों में व्यक्ति को लाना कठिन होता है लेकिन श्रीराम कथा मेें व्यक्ति स्वतरू खिंचा चला आता है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार वासियों को इस पवित्रा आयोजन से लाभ उठाना चाहिए। श्रीरामकथा का श्रीगणेश करते हुए कथा व्यास संत विजय कौशल ने कहा कि रामकथा श्रवण से जीवन की अशान्ति एवं अंध्कार दूर होता है। जिन लोगों को रामदर्शन की लालसा होगी वह खुद ही इस कथा का रसपान करने स्वयं ही आएगा। भगवान श्रीरामकथा मनोरंजन नहीं बल्कि मन का मैल दूर करने का साध्न है। व्यासपीठ से कथा को विस्तार देते हुए श्री कौशल महाराज ने कहा कि साधु जैसे-जैसे बूढ़ा होता है वैसे-वैसे वह आकर्षक हो जाता है ठीक इसके विपरीत संसारी व्यक्ति कुरूप लगने लगता है। जीवन में भोग ने आसन जमा लिया है। आज घरों में धर्म ग्रंथ है। किन्तु उनके पन्ने पलटे नहीं जाते। उन्होंने कहा कि जीवन के आधार में राम चाहिए, जिनके जीवन में राम हैं उनको दुनिया की कोई व्यथा हिला नहीं सकती। विजय कौशल महाराज ने इसी क्रम में भगवान शिव-पार्वती संवाद के माध्यम से वक्ता और श्रोता की महिमा का भी वर्णन किया। प्रथम दिन में कथा की पृष्ठभूमि को विस्तार देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान तो भक्त का कल्याण करने को प्रस्तुत हैं किन्तु कलयुग का व्यक्ति भगवान से उन्मुख नहीं होना चाहता है। इस मौके पर विधायक आदेश चौहान, कुंवर बृजेश रावत, राजीव वंशल, जिलाध्यक्ष जयपाल सिंह चैहान, मेयर अनीता शर्मा, अन्नू कक्कड, करन मल्होत्रा आदि प्रमुख रूप से मौजूद थे। श्रीराम कथा आयोजन समित के अध्यक्ष बृजभूषण विद्यार्थी, संयोजक डाॅ. जितेन्द्र सिंह, स्वागताध्यक्ष वीरेन्द्र तिवारी एडवोकेट, बालकृष्ण शास्त्री, अशोक अग्रवाल, अनिल गुप्ता, पंकज सहगल, आशीष वंसल, रमेश उपाध्याय, श्रवण गुप्ता, हिमांशु पंडित, आशीष शुक्ला, कन्हैया खेवडिया, विजय शर्मा, निशांत कौशिक, सुनील अनेजा, रवीन्द्र सिंघल सहित आयोजन समिति, व्यवस्था समितियों के सदस्यों ने श्रीमहाराज जी का पुष्पमालाओं से स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन महामन्त्री विमल कुमार ने किया।
