निविदाओं में हुई भारी अनिमितताए, घाटों की लिस्ट में भी भारी गोलमाल
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। भारत जागृति मिशन के बैनर तले अंशुल श्रीकुंज ने आरोप लगाया कि नमामि गंगे योजना के तहत माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश पर मां गंगा के 72 घाटों की नियमित सफाई के लिए नगर निगम हरिद्वार को 15 करोड 90 लाख रूपये का बजट प्राप्त हुआ है। निगम द्वारा बजट को ठिकाने लगाने का प्रयास किया जा रहा है। जिन घाटों की सूची तैयार की गयी है। उनमें काफी भारी अनिमितताए है। घाटों की सूची में उन घाटों को भी शामिल किया गया हैं, जिन घाटों को पूर्व में ही समाजिक संगठनों द्वारा गोद लिया जा चुका है। साथ ही कई ऐसे घाट हैं जिनको दो-दो बार स्थान बदल कर सूची में डाला गया है और अनन-फनन में निविदाए निकाल कर ठेका भी दे दिया गया है। इस बात की जानकारी अंशुल श्रीकुंज ने आज प्रेस क्लब हरिद्वार में पत्रकार वार्ता के दौरान दी। उन्होंने कहा कि नगर निगम प्रशासन ने इसके लिए निविदा आमंत्रित की हैं जिसमें बडे पैमाने पर भारी अनिमितताए है। जिसके सम्बंध् में उनके द्वारा पत्र के माध्यम से निगम प्रशासन से आग्रह किया गया था कि वह निविदा आमंत्रण में हुई अनिमितताओं को दूर कर दोबारा निविदा की विज्ञापति जारी करें। लेकिन निगम प्रशासन ने उनकी आपत्तियों का निस्तारण किये बिना ही घाटों की सफाई का ठेका दे दिया गया। लेकिन मां गंगा को स्वच्छ रखने की मुहिम में आयी करोड़ो की राशि का बंदरबांट नहीं होने देेगें। इसके लिए उनको उच्च न्यायालय की शरण में जाना पड़ा तो वह पीछे नहीं हटेगेें। प्रेसवार्ता के दौरान जगपाल सिंह सैनी, विभाष मिश्रा, सुमित तिवारी, अशरपफ अब्बासी आदि मौजूद थे।
