सन्त ने अपने खून से लिखा खत
प्रशासन ने उपचार के लिए ऋषिकेश एम्स भेजा
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। प्रशासन ने एक बार फिर मातृ सदन में धरने पर बैठे एक संत को जबरन उठा कर उसे उपचार के लिये ऋषिकेश स्थित एम्स भेजा हैं। बता दे स्वामी सानंद की मौत के बाद स्वामी गोपाल दास ने मातृ सदन पहुंचकर अपना अनशन शुरू किया था। साथ ही स्वामी गोपालदास ने बुधवार से मौनव्रत धारण करने के साथ ही जल भी त्याग दिया है। जिस की भनक लगते ही प्रशासन सक्रिय हो गया और प्रशासन ने पुलिस की मदद से संत को जबरन उठा लिया, लेकिन इस से पूर्व सन्त ने स्वामी गोपाल दास ने अपने आप को एक कमरे में बंद कर लिया और अपनी उंगली काटकर खून से एक पत्र भी लिख डाला। प्रशासन और मेडिकल की एक टीम स्वामी गोपाल दास का स्वास्थ्य परीक्षण करने मातृसदन पहुंची। लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य परीक्षण कराने से साफ इन्कार कर दिया और टीम को वापस भेज दिया। बताया जा रहा हैं कि संत गोपाल दास ने दो बार मेडिकल टीमों को वापस भेजा हैं। सन्त ने लिखकर बताया कि वे संथार प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं। इसमें न तो मेडिकल की जरूरत है और न ही किसी दूसरे व्यक्ति का हस्तक्षेप होना चाहिए।जिसके बाद फिर से प्रशासन की टीम पुलिस के साथ मातृ सदन पहुंची। इस दौरान स्वामी गोपाल दास ने खुद को कमरे में बंद कर लिया और वहांं खून से पत्र लिखा। इस बीच प्रशासन की टीम मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद महाराज से बातचीत करती रही और वहां से बैरंग लौटने को तैयार नहीं हुई। उन्होंने संत गोपाल दास के जीवन का हवाला देते हुए उन्हें जबरन कमरे से उठा लिया और डॉक्टरों की टीम के साथ ऋषिकेश भेज दिया। गौरतलब है कि स्वामी गोपाल दास को मंगलवार को एम्स से डिस्चार्ज कर हरिद्वार लाया गया था। अनशन के 117वें दिन मौन धारण करने के साथ ही उन्होंने जल भी छोड़ दिया। स्वामी गोपालदास ने जैन सम्प्रदाय में प्रचलित संथार प्रकिया के तहत देह छोड़ने का ऐलान भी किया था जिसको लेकर प्रशासन हरकत मे आ गया। मातृ सदन के स्वामी दयानन्द का आरोप हैं कि प्रशासन मातृ सदन के संस्थापक स्वामी शिवानन्द को मारने की भी रणनिति बना रहा है। जिसके चलते स्वामी गोपाल दास को उठा लिया गया है, जब इस संबंध में उप जिला अधिकारी मनीष कुमार सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि गोपाल दास के द्वारा जल त्यागने के बाद उनको उठाकर एम्स भेज दिया गया है ताकि उनके जीवन को बचाया जा सके।
