धर्म की रक्षा के लिये वर्ष 1893 में हुई गणेश उत्सव की शुरूवात
प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां शास्त्रोक्त रूप से पूर्ण वर्जित
लीना बनौधा
हरिद्वार। ज्योतिषाचार्य प0 विजय कुमार जोशी ने बताया कि भाद्रपद मास को शास्त्रों ने अत्यंत फलदायी व आध्यात्मिक माह बताया गया है, इस माह में माँगलिक कार्य नही होते लोक व्यवहार में निषिद्ध होते हुए भी ये माह धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत कल्याणकारी है। यह चातुर्मास का दूसरा महीना है इस माह में बहुत से व्रत और त्योहार होते है लेकिन कृष्ण पक्ष में जन्माष्टमी व शुक्ल पक्ष में गणेश उत्सव का विशेष अहम है। कलयुग में गंगा तीर्थ और गणेश ही प्रधान है। कहा गया है कि कलि चंडी विनायकों कलयुग में गणेश और चंडी( दुर्गा) पूज्य होंगे और प्रत्यक्ष चमत्कारिक फल प्रदान करेंगे।

उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति प्रचलित ग्रंथों के आधार पर है उसमें कुछ अपवाद व रहस्य भी है धर्मों रक्षति रक्षितः के आधार पर ये निर्विवाद सत्य है कि धर्म मानवता की आत्मा है और इसी में सनातन संस्कृति और राष्ट्रवाद समाहित है, इतिहास गवाह है मुगल काल से लेकर अंग्रेजो के सत्तासीन होने तक हिंदुओ पर पाबंदियां लगायी गयी शोषण हुआ धर्मांतरण हुये धर्म की रक्षा के लिये जन जागृति लाने व हिन्दू धर्म को एकत्रित करने के लिए लोकमान्य तिलक ने 1893 में गणेश उत्सव की शुरूवात की, सबसे पहले महाराष्ट्र में ये उत्सव शुरु हुआ बाद में पूरे देश में इस पर्व को हर्षाेल्लास व धूमधाम से बनाये जाने लगा, सभी ग्रह, नक्षत्र , राशि में गणेश जी का ही अंश माना गया है।
ज्योतिषाचार्य प0 विजय कुमार जोशी का कहना कि ज्योतिष शास्त्र में बुध और केतू से गहरा सम्बन्ध है इस बार सिंह राशि मे चातुसग्रही योग और दो शुभयोग अत्यंत चमत्कारिक योग प्रद है। गणेश जी का जन्म भी सोमवार को पांच शुभ ग्रह के एक साथ होने पर हुया था। गणेश स्थापना व मूर्ति प्रतिष्ठा प्रबल और विशेष योग है, जो राष्ट्र को भी शक्ति प्रदान करेगा। कुछ समाज सेवी , बुद्धि जीवी मूर्ति के विसर्जन को गलत बताते है वो पूर्ण रूप से निराधार है और कुतर्क है, यहां गणेश प्राधान देवता है और इनकी पूजा से पहले भी गणेश पूजा होगी, वो गणेश नहीं विसर्जन करने चाहिए, प्रधान गणेश तो एक भावनात्मक प्रतीक है। पूजा के बाद विसर्जन किया जा सकता है, गणेश तंत्र में चाक की मिट्टी से बनी प्रतिमा का विशिष्ट नियम और निर्देश दिया है अंगुष्ट से हथेली तक कि प्रतिमा बनानी चाहिए। इसमें पर्यावरण, जल व जलीय जंतुओं को भी कोई हानि नही है।
प0 विजय कुमार जोशी जी ने बताया कि शास्त्रों में बड़ी प्रतिमा का कही भी कोई उल्लेख नही है प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां शास्त्रोक्त रूप से भी वर्जित है। और पर्यावरण के हर अंग को नुकसान पहुँचाएगी। समाज सेवियों को इन मूर्तियों का विरोध करना चाहिए न कि विसर्जन करना चाहिए। गणेश उत्सव आत्म बोध की वो तकनीकी प्रक्रिया है जहां व्यक्ति कुछ समय के लिये सांसारिक क्रिया कलापों से हटकर ध्यान और आनन्द के माध्यम से ईश्वरी तत्व का अनुभव करता है ये ही सनातन संस्कृति है गणेश जल तत्व के देवता है और जल ही सृष्टि का उद्भव केंद्र है, इसलिए विसर्जन एक आध्यात्मिक सन्देश देता है, ऐसी भी मान्यता है कि भगवान गणेश एक बार पानी मे डूबने के बाद पार्वती और शिव के पास कैलाश पर्वत लौट आते है।
आप सभी को गणेश उत्सव की बहुत बहुत शुभकांमनाये एवं बधाई।
प0 विजय कुमार जोशी
मोती ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र
कनखल, हरिद्वार
