प्रधानमंत्री व केन्द्रीय गृह मंत्री से फिर लगाई न्याय की गुहार
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। पत्रकार को चौथा स्तंभ कहा जाता है, पत्रकार अपनी कलम से लोगो को जागरूक कर सही रस्ता दिखाने का काम करता है, पर उस पत्रकार को क्या मालूम होता है कि जिस रास्ते पर वह चल रहा है, वो उसके व परिवार के लिए खतरा बन सकता है। आखिर क्यों देश की राज्य सरकारें पत्रकरों पर हो रहें अत्याचारों पर अंकुश नहीं लगा पा रही हैं, वही बड़ी-बड़ी बातें करने वाले राज्य सरकारे पत्रकारों के हितों की रक्षा व उनकी सुरक्षा के बडे—बडे दावे करती है। लेकिन जब वास्तव में पत्रकारों का उत्पीड़न होता हैं तो वह मौन क्यों हो जाती है? जोकि सब से बड़ा सवाल बन कर उभरा है।
पत्रकार को स्वंय अपनी लड़ाई लड़कर न्याय मिलने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती है। ऐसा ही एक मामला हरिद्वार धर्मनगरी से जुड़ा है, जहां वरिष्ठ पत्रकार को 8 महीने बीत जाने के बाद भी इंसाफ नही मिला पाया है और ना ही आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई। वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रकाश चौहान ने अपने साथ हुई जस्तियों को लेकर सोमवार को प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री को फिर से पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
