
डीपीएस दौलतपुर में ‘तथास्तु’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन
अशोक वर्मा/ हरीश संतवानी
हरिद्वार। किसी भी कार्य को करने से पहले चिंतन आवश्यक है। हम जैसा सोचते हैं वैसे ही बन जाते हैं। यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम सकारात्मक सोच को वरीयता देते हैं अथवा नकारात्मक को। उक्त बात डीपीएस दौलतपुर में ‘तथास्तु’ विषय पर आयोजित सेमीनार में पीयूष जैन ने कही। शनिवार को आयोजित उक्त सेमीनार में श्री जैन ने कहा कि बुरी बात ग्रहण करना मानव का स्वाभाविक गुण हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी के जीवन में बहुत कम बुरी घटनाएँ होती हैं, फिर भी हम अच्छी घटनाओं की अपेक्षा बुरी घटनाओं का आँकलन त्वरित् गति से करना प्रारंभ कर देते हैं और उसका विश्लेषण करते-करते वह इतनी बड़ी हो जाती है कि वह हमारे जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालने लगती है। उन्होंने बुरी घटनाओं से भी सकारात्मक प्रेरणा लेने की सलाह दी। बताया कि सकारात्मक चिंतन मानव की इच्छाओं को पूर्ण करने में सहायक है। कहा कि किसी भी वस्तु के बारे में 21 से अधिक बार चिंतन करने से वह स्वतः ही हमारे मस्तिष्क में आ जाती है। इस दौरान प्रधानाचार्या श्रीमती पूनम श्रीवास्तव, विकास गोयल, लवी गोयल, शालू जैन आदि मौजूद थे।
