लालच में गवाया खाते धारकों का रूपया व करोड़ो की प्रोपर्टी
सौ करोड़ का काला धन सफेद करने में बीस करोड़ कमाने का लालच
एक हजार करोड़ की पुरानी करैंसी बदलने में मिल रहे कमीशन ने डूबाया
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। कोतवाली ज्वालापुर पुलिस ने मुस्लिम फण्ड प्रकरण का खुलासा करते हुए मुख्यारोपी समेत तीन लोगों को गिरफ्रतार किया है। पूछताछ के दौरान मुस्लिम फण्ड के संस्थापक ने खुलासा किया कि सौ करोड के काले धन को सफेद करने मिलने वाले लाभ तथा एक हजार करोड़ के पुराने करैंसी को नई करैंसी में बदले में मिलने वाले मोटा कमीशन के लालच मंे मुस्लिम फण्ड में जमा खाते धारकों की कराड़ों की धनराशि और करोड़ों की प्रोपर्टी ठिकाने लगा दी। खातेदारों की देनदारी के बचने के लिए वह फरार हो गया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सम्बंधित धाराओं में मामला दर्ज करते हुए मेडिकल के बाद न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया। पुलिस टीम इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश में जुट गयी है। इस बात की जानकारी एसपी सिटी स्वतंत्र कुमार ने कोतवाली ज्वालापुर में पत्रकार वार्ता के दौरान दी।

उन्होंने बताया कि वसीम पुत्र समीम रावत निवासी ग्राम इब्राहिमपुर थाना पथरी हरिद्वार ने 21 जनवरी 2023 को कोतवाली में तहरीर देकर शिकायत की थी। शिकायत में कहा गया था कि कबीर म्युचल बैनिफिट लि0 मुस्लिम फण्ड के संस्थापक अब्दुल रज्जाक पुत्र सरफू निवासी ग्राम सराय थाना ज्वालापुर हरिद्वार के द्वारा बैंक में उसके द्वारा जमा किये गये 2.81 लाख धनराशि व हजारों अन्य लोगों की जमा राशि लेकर फरार हो गया है। उन्होंने बताया कि एसएसपी अजय सिंह ने मामले को गम्भीरता से लेते हुए एसपी सिटी, सीओ ज्वालापुर के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक ज्वालापुर को घटना का शीध्र अनावरण करने के निर्देश दिये गये थे। इस मामले के खुलासे के लिए पुलिस की 6 टीमों का गठन किया गया। पुलिस टीमों को सौपी गयी जिम्मेदारी पर काम करना शुरू कर दिया। पुलिस टीम के जांच के दौरान पता चला कि मुस्लिम पफण्ड मंें कुल 13,382 खाते सक्रिय थे। जिनमें 8,716 खातों में 500 रूपये से कम ध्नराशि जमा थी।
एसपी सिटी ने बताया कि मुस्लिम फण्ड में खाता धारकों के करीब कुल साढे सात करोड़ की धनराशि बैंक में जमा होना पाया गया। जिनमें डेढ करोड़ रूपये का सोना गिरवी रखकर 12 प्रतिशति ब्याज देना पाया गया। पुलिस टीम मुस्लिम फण्ड के संस्थापक अब्दुल रज्जाक व उसके परिजनों व संदिग्ध सहयोगियों के 23 बैंक खातों को फ्रीज किया गया। उन्होने बताया कि जांच के दौरान मालूम हुआ कि खाता धारक मुस्लिम फण्ड में जमा धनराशि जोकि बगैर ब्याज लिए जमा करा रहे थे। मुस्लिम पफण्ड संस्थापक अब्दुल रज्जाक व उसके साथी इस धनराशि को प्रोपर्टी की खरीद फरोख्त में लगाकर अपनी निजी लाभ साध् रहे थे। वहीं एक पुलिस टीम मुस्लिम फण्ड संस्थापक की तलाश में जुटी थी। जिसको पुलिस ने सूचना पर क्षेत्र से गिरफ्रतार कर लिया।
आरोपी अब्दुल रज्जाक ने पूछताछ के दौरान बताया कि वर्ष 2013 से मुस्लिम फण्ड में जमा करायी गयी धनराशि को अपने साथियों नसीम उर्फ मुन्ना पुत्र जिंदे हसन और मशरूर पुत्र इरशाद अली निवासीगण ग्राम सराय ज्वालापुर के माध्यम से प्रोपर्टी के कारोबार में लगाया गया था। एसपी सिटी ने बताया कि आरोपी ने बताया कि वर्ष 2020 में मशरूर व नसीर उर्फ मुन्ना ने उसकी मुलाकात सम्भल यूपी निवासी अन्सार से करायी। जोकि अपने परिचित मुम्बई निवासी साजिद के सौ करोड़ का काला धन किसी पंजीकृत संस्था में दान देकर सफेद कराना चाहता था, जिसके बदले उसको 80 करोड़ वापस करने थे। इसी बीस करोड़ लाभ लेने के चक्कर में वह फंस गया।
इसी दौरान 6 माह बाद उसके साथियों नसीर उर्फ मुन्ना और मशरूर ने अब्बास नाम के व्यक्ति से मुलाकात करायी। जिसके पास एक हजार करोड़ की पुरानी करैंसी थी जिसको नई करैंसी में बदलने के लिए अच्छी खासी कमीशन दी जा रही थी। उक्त दोनों मामलों मेें अच्छा पैसा मिलने के लालच में उसने मुस्लिम फण्ड में खाते धारकों की जमा करोड़ों की धनराशि व करोड़ों की प्रोपर्टी को ओने पौने दामों में ठिकाने लगा बैठा।
उन्हांेेने बताया कि जब अब्दुल रज्जाक लालच के चक्कर में सब कुछ खत्म कर बैठने का अहसास हुआ तो वह खाते धारकों की धनराशि देने से बचने के लिए वह फरार हो गया। पुलिस ने मुख्यारोपी की निशानदेही पर उसके दोनों साथियों नसीम उर्फ मुन्ना और मशरूर को गिरफ्रतार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सम्बंधित धाराओं में मामला दर्ज करते हुए मेडिकल के बाद न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया। पुलिस टीम अन्य आरोपियांे की तलाश में जुट गयी है।
प्रेसवार्ता के दौरान एसपी क्राइम श्रीमती रेखा यादव, सीओ ज्वालापुर निहारिका सिंह सेमवाल, कोतवाली ज्वालापुर प्रभारी आरके सकलानी, एसएसआई संतोष सेमवाल आदि मौजूद रहे।
