♦दूध पिलाते वक्त फेफडों में दूध चले जाने पर सास लेने हो रही थी दिक्कत
♦गम्भीर बच्चे को दो हॉस्पिटल के द्वारा किया जा चुका था हॉयर सेंटर रेफर
♦सलेमपुर रावली हरिद्वार निवासी माता-पिता बच्चे को लेकर पहुंचे थे एनपीपीएल हॉस्पिटल
♦तीन दिनों तक बच्चे को वेंटीलेटर और सेमी वेंटीलेटर पर रखकर किया गया उपचार
♦बच्चे के पूर्ण स्वास्थ होने पर परिजनों ने जताया हॉस्पिटल के चिकित्सकों का आभार
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। एनपीपीएल हॉस्पिटल ने एक बार फिर गम्भीर 22 दिन के बच्चे का जीवन को बचाकर जनता में अपना विश्वास कायम रखने मे सफलता हासिल की है। बताया जा रहा हैं कि 22 दिन के बच्चे को उसके फेफडों में दूध चले जाने पर उसको सास लेने में भारी दिक्कत होने पर उसको उपचार के लिए हॉस्पिटल लाया गया था। बताया जा रहा हैं कि दो हॉस्पिटलो के द्वारा बच्चे की हालत देखते हुए उसको रेफर कर दिया था। एनपीपीएल हॉस्पिटलं में चिकित्सक डॉ. विकास गुप्ता और डॉ. नमन सेठी की टीम ने बच्चे की हालत को देखते हुए उसको तीन दिनों तक वेंटीलेट और सेमी वेंटीलेटर पर रखकर उपचार करते हुए जीवन बचा लिया। बच्चे के स्वास्थ होने पर आज उसको डिस्चार्ज कर दिया। बच्चे के जीवन बच जाने पर माता-पिता ने चिकित्सकों का आभार व्यक्त किया है।
एनपीपीएल हॉस्पिटल के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. मनोज मिश्रा ने बताया कि राहुल कुमार निवासी नेहरू कॉलोनी सलेमपुर रावली रानीपुर हरिद्वार अपने 22 दिन के बच्चे को गम्भीर हालत में उपचार के लिए हॉस्पिटल लेकर पहुचे। बच्चे को सास लेने में भारी परेशानी हो रही थी। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास गुप्ता और डॉ. नमन सेठी ने बच्चे की हालत देखते हुए तत्काल उसको वेंटीलेटर पर ले जाकर उसका उपचार शुरू कर दिया। बच्चे की मां कामनी ने बताया कि बच्चे को दूध पिलाते वक्त उसको सास लेने में दिक्कत शुरू हो गयी थी। जिसपर बच्चे के उपचार के लिए दो हॉस्पिटल ले जाया गया। जहां पर चिकित्सकों ने बच्चे की हालत गम्भीर देखते हुए उसको हॉयर सेंटर रेफर कर दिया।
उन्होंने बताया कि दूध पिलाते वक्त बच्चे के फेफडों में दूध चले जाने पर बच्चे को सास लेने के दिक्कत शुरू हो गई थी। चिकित्सकों की टीम ने बच्चे को तीन दिनों तक वेंटीलेटर और तीन दिनों सेमी वेटींलेटर पर रखकर उसका उपचार किया गया। बच्चे के पूर्ण रूप से स्वास्थ होने पर बच्चे को उसके मात-पिता के सुपूर्द कर दिया। उन्होंने बताया कि समय रहते बच्चे को उपचार मिल जाने पर उसके जीवन को बचाया जा सका। यदि देरी हो जाती तो बच्व्चे के जीवन को बचाया नहीं जा सकता था। बच्चे के स्वास्थ होने पर माता-पिता ने चिकित्सक की टीम का आभार जताया है। बच्चे के उपचार में टीम में डॉ. विकास गुप्ता, डॉ. नमन सेठी, मोहम्मद सलमान, डॉ. शुभम, डॉ. अकस्थ और डॉ. सनहा शामिल रही।



