कब्जा करने वाले लोगों को भाजपा पार्षद के सरंक्षण का आरोप
भाजपा नेता कर रहे पुलिस को गुमराह, आश्रम में पुलिस व पीएसी तैनात
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। नानकपुरा आश्रम के महासचिव एवं ट्रस्टी सुरजीत सिंह ने स्थानीय भाजपा पार्षद पर पुलिस पर दबाव बनाकर पंजाब के एक सिख को कब्जा कराने में मदद करने का सनसनी खेज आरोप लगाया है। इतना ही नहीं संस्था के लोगों का आश्रम से समान बाहर फैंकने व कागज व पैसे निकाल कर उनको आश्रम से बाहर निकाल देने की बात कही है। आश्रम के ट्रस्टीयों की कोई दलील सुने व कोई दास्तावेज देखे ही आश्रम में पुलिस व पीएससी तैनात कर दी गयी है। इस बात की जानकारी आज नानकपुरा आश्रम के महासचिव एवं ट्रस्टी सुरजीत सिंह ने प्रेस क्लब हरिद्वार में पत्रकार वार्ता के दौरान दी। उन्होंने कहा कि नानकपुरा आश्रम वेलपफेयर ट्रस्ट सोसाइटी का गठन 30 जुन 2000 में हुआ था। जिसका गठन संत बाबा बचन सिंह द्वारा किया गया था और वही आश्रम के अध्यक्ष चले आ रहे थे। लेकिन इस आश्रम पर निर्मल सिंह निवासी तरनतारन पंजाब की निगाह लगी हुई थी। जिसको बाबा संत बचन सिंह अधिक जानते थे। इसलिए उन्होंने आश्रम के सम्बंध् में वर्ष 2003 में एक वसीयत संस्था के पक्ष में तैया कर दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 में बाबा संत बचन सिंह का स्वास्थ्य खराब रहने लगा और इसी बीच उनकी किडनी भी खराब हो गयी। जिसकारण उनको एक सप्ताह में तीन बार डायलेसिस के लिए मैक्स हाॅस्पिटल देहरादून जाना पड़ता था। जिसकारण उनका दिमाग भी सुस्त रहने लगा था। इसी बीच अक्टूबर 2018 में सेवा के बहाने आश्रम में निर्मल सिंह अपने साथ चार महिलाओं व अन्य सेवादारों को साथ आश्रम मेें प्रवेश कर गया और सेवा करने लगा। कुछ सेवादारों को सेवा के बहाने बाबा संत बचन सिंह की निगरानी में लगा दिया। जब भी बाबा संत बचन सिंह को मैक्स हाॅस्पिटल ले जाया जाता तो वह सेवादार भी उनकी कार में सवार हो जाते। इसी बीच दिसम्बर 2018 में कुछ फर्जी कागजात तैयार कर चिटस फण्ड कार्यालय में दाखिल किये गये। जिसमें सदस्यों की लिस्ट पंजीकृत होना दर्शाया गया। जिसमें अध्यक्ष निर्मल सिंह और महासचिव बीबी सुखबीर कौर को दर्शाकर बिना किसी ट्रस्टी की सहमति व हस्ताक्षर से दाखिल कर दिया गया। उन्होंने बताया कि कुछ दिनों बाद बाबा संत बचन सिंह को बहला फुसला कर उनको उपचार ऋषिकेश में कराने की सलाह देते हुए उनको वहां ले जाया गया और उसी दिन फर्जी शपथ पत्र तैयार कर लिया गया। जिसके आधार पर बीबी सुखबीर कौर 20 फरवरी 2019 को अपने को मंहतानी दर्शाकर न्यायालय हरिद्वार में एक मुकदमा पंजीकृत कराया गया। तब कि बाबा संत बचन सिंह जीवित थे और उसी दिन शाम को बाबा संत बचन सिंह की मृत्यु हो गयी। जिसकी जानकारी इनके द्वारा मैक्स हाॅस्पिटल में जाकर बाबा जी मृत्यु की जानकारी दी गयी। लेकिन आश्रम में मौजूद आश्रम के उपाध्यक्ष जगजीत सिंह को उनकी मृत्यु की खबर नहीं दी गयी। उन्होंने बताया कि बाबा संत बचन सिंह के मृत्यु के पश्चात ही इनके द्वारा ही अपने व्यक्ति को प्रतिवादी बनाकर अपने ही खिलाफ एक मुकदमा डलवाया गया। जिसमें दोनों हमसाज होकर आश्रम की सम्पत्ति को हड़पना चाहते थे। लेकिन जैसे ही संस्था को इस मामले की जानकारी लगी तो संस्था ने पार्टी बनने की उसमें दरखास्त दी। मगर अगली तारीख पर ही इन लोगों ने अपना मुकदमा वापस ले लिया। जिसको देखते हुए शक पैदा होता हैं कि इन्होंने ही आश्रम की सम्पत्ति हड़पने के लिए सुनियोजित तरिके से बाबा संत बचन सिंह की हत्या की होगी। जिसके सम्बंध् में संस्था द्वारा एक तहरीर एसएसपी व एसपी सिटी को दी गयी। आरोप हैं कि कब्जा करने वालो को स्थानीय भाजपा पार्षद अनिल मिश्रा का सरंक्षण प्राप्त हैं और उसके द्वारा पुलिस पर दबाव बनाकर आश्रम के लोगों के खिलाफ कार्यवाही करवाते हुए निर्मल सिंह को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस द्वारा आश्रम के लोगों की कोई बात नहीं सुनी और ना ही कोई दस्तावेज ही देखे और 02 अप्रैल 19 को पुलिस ने संस्था के लोगों को आश्रम से बाहर निकाल दिया गया। भाजपा पार्षद व भाजपा नेताओं द्वारा पुलिस को गलत जानकारी देकर उनको गुमराह किया जा रहा है। जिसके चलते आश्रम में पुलिस व पीएसी तैनात कर दी गयी। प्रेसवार्ता के दौरान आश्रम के ट्रस्टी जोगेन्द्र सिंह आदि मौजूद थे।
