मुकेश वर्मा
हरिद्वार। एक महामण्डेश्वर ने मातृ सदन के संत पर अखबारों में छपी खबरों का हवाला देते हुए गम्भीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से उनकी जांच की मांग की है। महामण्डलेश्वर स्वामी राजेन्द्रानंद सरस्वती ने शुक्रवार को एक होटल में पत्रकार वार्ता के दौरान मातृ सदन पर आरोप लगाये है। उन्होंने कहा कि मातृ सदन के संत एक तरफ तो खनन का विरोध करते हैं तो दूसरी ओर पक्के मकान में रहते है। आश्रम तो मिट्टी का भी बन सकता है, टीन का भी बन सकता है, घास फूस का भी बन सकता है, तो मातृ सदन आश्रम में सीमेंट में बालू क्यों पक्के मकान क्यो ? आप तो रहे पक्के मकान में और जनता घास फूस के मकान में रहे।
महामण्डलेश्वर ने आरोप लगाया कि अगर यह गंगा मैया के सच्चे हितेषी हैं, तो बिहार में जाकर गंगा के लिए क्यों नहीं काम करते हैं ? वहां गंगा मैया की सबसे ज्यादा दुर्दशा है। इनके पास इतने संसाधन कहां से आते हैं, सेशन कोर्ट, हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट प्रशासन में इनका तंत्र का तुरंत बोलबाला हो जाता है, यह जांच का विषय है। जबकि एक आम व्यक्ति सामान्य से एक केस में दम तोड़ देता है और उनके पास इसके लिए इतने संसाधनों का बैकअप कौन दे रहा है ? क्यों दे रहा है ? और किस लिए दे रहा है ? कहीं इनका मंसूबे राज्य को अस्थिर पैदा करना तो नहीं है। इन सभी की जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि हरिद्वार में आंदोलन की कहीं वजह अंतरराष्ट्रीय स्थल तो नहीं, यहां किया गया आंदोलन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनेगा फिर अंतरराष्ट्रीय चंदा करने में सहयोग मिलेगा। उनकी प्रशासन से मांग हैं कि वर्ष 2004 से वर्ष 2014 तक संत के कौन-कौन संपर्क में था, कौन-कौन इनसे मिला और कहां-कहां से इन्हें चंद के रूप पैसे मिले। और वर्ष 2014 से अब तक वहीं जांच दोबारा हो कि वर्ष 2014 से अब तक कौन-कौन लोग इनके सम्पर्क में है और इनके आय के स्रोत क्या है?
उन्होने कहा कि स्वामी इस बात का भी खुलासा करे कि वह कौन से संत हैं गृहस्थ हैं या समाजसेवी हैं या फिर सन्यासी है। यदि वह समाज सेवी हैं तो उन्होंने अब तक कितने समाज सेवा का कार्य किया हैैं। उन्होंने अपनी जानकारी देते हुए कहा कि वह गृहस्थ सन्यासी हैं। जिनको जगद्गुरु शंकराचार्य अनन्ता नंद सरस्वती जी महाराज राजगुरु मठ काशी के आशीर्वाद से महामंडलेश्वर पद का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
