♦मुख्यमंत्री को सम्बोधित एक ज्ञापन एडीएम को सौप कर, की मांगों को पूरा करने की मांग
♦शासन-प्रशासन को चेताया कि मांगों को नजर अंदाज किया तो होगा उग्र आंदोलन
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। उत्तराखंड की भोजनमाताओं ने अपनी मांगों को लेकर राज्यव्यापी हड़ताल करते हुए रोशनाबाद स्थित विकास भवन पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान जनपद हरिद्वार के 6 ब्लॉकों की भोजनमाताओं ने हिस्सा लिया। भोजनमाताएं ने अपनी मांगों के सम्बंध में मुख्यमंत्री को सम्बोधित एक ज्ञापन एडीएम को सौपा।
इस दौरान यूनियन की कोषाध्यक्ष नीता ने कहा कि उत्तराखंड की हजारों मिड-डे-मील वर्कर (भोजनमाता) वर्षों से अल्प मानदेय, अतिरिक्त काम के बोझ, मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न और प्रशासनिक उपेक्षा को झेल रही है। सरकार द्वारा घोषित 5 हजार का मानदेय आज तक लागू नहीं हुआ है। वहीं स्कूलों में भोजनमाताओं से उनके कार्यक्षेत्र से बाहर स्कूल के कमरों व मैदान की सफाई, चौकीदारी, माली और अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों आदि कार्य कराए जा रहे हैं।
भेल मजदूर ट्रेड यूनियन के महामंत्री अवधेश ने कहा कि कई विद्यालयों में गैस चूल्हा, पानी व मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। स्कूल खुलने से लेकर बंद होने तक भोजनमाताओं को स्कूलों में रखा जाता है और विरोध करने पर काम से हटाने की धमकी व अभद्र टिप्पणियां की जाती हैं। भोजनमाताओं को कोई छुट्टी नहीं दी जाती है। कुछ मामलों में भोजनमाताओं के साथ अपमानजनक व्यवहार भी सामने आया है।
क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के नासिर अहमद ने कहा कि अभी हाल ही में उत्तराखंड सरकार ने उत्तराखंड राज्य में समान नागरिक संहिता लागू की है। एक तरफ सरकार कहती है कि एक देश, एक राज्य में दो कानून नहीं चलेंगे, मगर वहीं दूसरी ओर सरकार न्यूनतम वेतनमान में इतना भारी फर्क कर रही है। इतनी भयावह बढ़ती महंगाई के बीच मजदूर मेहनतकश जनता का अस्तित्व खतरे में है।
इंकलाबी मजदूर केंद्र के हरिद्वार प्रभारी पंकज ने कहा कि एक ओर 25 हजार भोजनमाताओं की हालत इतनी बुरी है। वहीं दूसरी ओर हम गरीबों के प्रतिनिधियों (सांसद, विधायकों) के वेतन भत्ते बढ़ते जा रहे है। वर्ष 2018 से अब तक उत्तराखंड सरकार ने विधायको के पेंशन, वेतन भत्तों में दो से तीन बार बढ़ोतरी कर दी है। वेतन भत्ता बढ़ाकर 2 लाख 90 हजार से 4 लाख कर दिया है। पेंशन 40 हजार से बढ़ाकर 60 हजार कर दी है। भोजनमाताओं ने सवाल उठाया कि एक ही देश में इतनी भारी असमानता और अन्याय क्यों है।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और महिला सशक्तिकरण जैसे विज्ञापनों पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। लेकिन उत्तराखंड में अंकिता भंडारी जैसे हत्याकांड हो रहे हैैं। जिसमें भाजपा के ही बीआईपी का नाम आ रहा है। और उत्तराखंड सरकार उस बीआईपी को बचाने में भी बहुत पैसा लगा रही है। लेकिन उत्तराखंड में काम करने वाले कर्मचारियों की मांगों को अनसुना कर रही है।
इस दौरान यूनियन की कार्यकारिणी सदस्य ललिता ने कहा कि भोजनमाताएं अपनी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर आज उत्तराखंड की भोजनमाताओं ने राज्यव्यापी हड़ताल की हैं। यदि सरकार ने समय रहते भोजनमाताओं की जायज मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को ओर तेज किया जाएगा। जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
प्रदर्शनकारियों में ललिता, पूनम, मीनाक्षी, सीमा, नीता, आदि सैकड़ों भोजनमाताएं शामिल रही। हड़ताल के समर्थन में क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के नासिर अहमद, इंकलाबी मजदूर केंद्र के पंकज, जयप्रकाश, भेल मजदूर ट्रेड यूनियन से अवधेश,कर्मचारी सत्यम ऑटो से महीपाल, किर्बी श्रमिक कमेटी से कृष्ण मुरारी, देवभूमि श्रमिक संगठन तथा समाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट रुप चंद आजाद आदि लोग शामिल रहे।

