♦झुग्गी-झोपडियों व खोखों की आड में सरकारी भूमि पर कब्जा माफियाओं का बोलबाला
♦माफियाओं में सफेदपोश लोग भी शमिल, अवैध अतिक्रमण की आड में वसूल रहे किराया
♦नगर निगम की भूमि पर आज भी अवैध वाहन धुलाई व सर्विस सेंटर हो रहे संचालित
♦नगर आयुक्त नंदन कुमार कब करेगें ऐसे खोखों पर बुलडोजर की कार्यवाही ?
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। प्रशासन की ओर से बीते रोज टिबडी रेलवे फाटक के समीप रेलवे की भूमि पर अवैध अतिक्रमण कर बसी झुग्गी-झोपडी के खिलाफ कार्यवाही करते हुए सरकारी भूमि पर कब्जा माफियाओं को कडा जबाब दिया है। बताया जा रहा हैं कि सरकारी भूमि पर कुछ माफियाओं द्वारा कब्जा कर उस भूमि पर अवैध खोखे या फिर झुग्गी झोपडी बसा कर उनके प्रतिमाह किराया वसूला जाता है। शहर में माफिया खोखों व झुग्गी-झोपडी की आड में सरकारी भूमि पर कब्जा जमाये बैठे है, माफियाओं में कुछ सफेदपोश भी शमिल हैं, जिनके द्वारा नगर निगम, सिंचाई विभाग समेत अन्य विभागों की भूमि पर कब्जा जमाये हुए है।
बताते चले कि प्रदेश में किसी भी सरकारी भूमि पर, सड़क किनारे, फुटपाथ एवं सार्वजनिक स्थलों पर कोई अतिक्रमण न हो इसके निर्देश सूबे के मुख्यमंत्री द्वारा सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए है। जिसके तहत हरिद्वार जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में जनपद हरिद्वार में भी अवैध अतिक्रमण के लिए वृहद स्तर पर कार्यवाही की जा रही है। जिसके से सरकारी भूमि कब्जा माफियाओं में हड़कम्प की स्थिति है।
इसी क्रम में बीते रोज नगर मजिस्ट्रेट हर गिरी के नेतृत्व में टीबड़ी रेलवे अंडर ब्रिज (आंबेडकर चौक) के पास रेलवे की भूमि पर अवैध रूप से बसी करीब 40-45 झुग्गी झोपड़ियों को रेलवे प्रशासन, पुलिस एवं जिला प्रशासन की टीम द्वारा सयुक्त रूप से कार्यवाही करते हुए हटाया गया। रेलवे के अंसिटेंट डिवीजन इंजिनियर अनुज कुमार की माने तो रेलवे अपनी इस भूमि को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराने के लिए करीब एक माह से प्रयासरत था। जिसके सम्बंध में रेलवे की ओर से अवैध अतिक्रमणकारियों से उक्त भूमि पर बसे होने के सम्बंध में भूमि सम्बंधी दस्तावेज रेलवे के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया था।
अंसिटेंट डिवीजन इंजिनियर अनुज कुमार के अनुसार अवैध अतिक्रमणकारियों द्वारा कोई जबाब नहीं दिया, जिसके पश्चात रेलवे की ओर से उनको भूमि खाली करने के सम्बंध में नोटिस जारी किया गया। लेकिन उसके बावजूद रेलवे की भूमि पर से अवैध अतिक्रमण नहीं हटा, जिसके पश्चात रेलवे ने जिला प्रशासन से भूमि खाली कराने के लिए पत्रचार किया गया। जिसके आधार पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्यवाही अमल में लाई गई।
बताया जा रहा हैं कि रेलवे की भूमि पर कब्जा कर झुग्गी-झोपडिया बसाने के पीछे सरकारी भूमि कब्जा माफियाओं का हाथ था। आरोप हैं कि माफियाओं द्वारा प्रतिमाह झुग्गी झोपडी वालों से प्रतिमाह वसूलते रहे थे। अगर गौर करे तो वहां पर बसे लोग उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार आदि प्रदेशों के रहने वाले थे। जिनके लिए बिजली-पानी की व्यवस्था भी की गई थी। विद्युत विभाग के जेई संध्या की माने तो वहां पर सात अस्थाई विद्युत कनेक्शन थे। जिनके मीटर तक लगे हुए थे, जिन लोगों के नाम पर कनेक्शन थे उनका कोई भी भुगतान पेंडिग नहीं है। प्रशासन की कार्यवाही होने पर उन्होंने अपने मीटर अपने कब्जे में ले लिये है।
सवाल उठता हैं कि सरकारी भूमि पर विद्युत विभाग हो या फिर जल संस्थान आखिर कैसे वहां पर बिजली पानी की व्यवस्था करा दी गई, चाहे वह व्यवस्था अस्थाई ही क्यों ना हो, विद्युत विभाग और जल संस्थान द्वारा सुविधा उपलब्ध कराने से पूर्व उक्त भूमि के सम्बंध में एनओसी क्यों नहीं ली गई। जिससे साबित होता हैं कि सरकारी भूमि पर बसी झुग्गी-झोपडी के खेल के पीछे कुछ दबंग माफियाओं का हाथ है। प्रशासन को ऐसे माफियाओं का पता लगाकर उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही करनी चाहिए जोकि सरकारी भूमि पर कब्जा कर खोखे या फिर झुग्गी झोपडी बसा रहे है। जोकि अक्सर प्रशासन के लिए भी मुसीबत बनते है।
शहर के भीतर आज भी नगर निगम हरिद्वार की भूमि पर कई वाहन धुलाई स्टेशन व सर्विस सेंटर संचालित हो रहे है। जिनमें अवैध तरीके से विद्युत और पानी का कनेक्शन उपलब्ध है। जिनको सरकारी भूमि माफिया किराये देकर उनसे मोटा किराया वसूल रहे है। ऐसा नहीं कि नगर निगम कर्मचारियों को ऐसे अवैध खोखो की जानकारी नहीं हैं, लेकिन वह भी चुप्पी साधे हुए है। क्या नगर निगम आयुक्त नंदन कुमार ऐसे खोखों को चिहिंत कर उनके खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्यवाही करेगें ? या फिर यूं ही नगर निगम की भूमि पर अवैध खोखे संचालित होते रहेगें।

