
दो दिवसीय ज्ञान कुम्भ का महामहिम ने किया उद्घाटन
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि देश में शिक्षा को जन-जन तक पहुचाने के लिए नैतिकता, समर्पण और प्रमाणिकता की सर्वाधिक आवश्यकता है। संस्कारों के बीज बोना शिक्षकों की जिम्मेदारी है। उच्च शिक्षा में गुणवत्ता के लिए शोध् को बढ़ावा देना देश और समाज के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही देश, समाज और व्यक्ति के प्रगति का आधर रहा है। देश में आदर्श शिक्षक के कई उदाहरण है, जो हमे प्रेरित कर रहा है। हम सबका यह दायित्व है कि देश का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। ज्ञानकुंभ के आयोजन का मकसद उच्चतर शिक्षा में गुणात्मक सुधर और भविष्य की चुनौतियों का समाधान तलाशना है। महामहिम यहा पतंजलि योगपीठ केन्द्र दो में दो दिवसीय ज्ञान कुम्भ के उदघाटन के बाद उपस्थित शिक्षाविदों, गणमान्य लोगों को संबोधित कर रहे थे। महामहिम ने कहा कि शिक्षा को बढ़ावा देेने के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय है, इस समन्वय का लाभ सभी को मिले, इस दिशा में मिलकर कार्य करना होगा। शिक्षा की गुणवत्ता के लिए शिक्षक, विद्यार्थी एवं प्रबध्ंन का बेहतर होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हर बच्चे में कोई न कोई प्रतिभा अवश्य होती है, जरूरत है बेहतर शिक्षक बनकर उस प्रतिभा को बाहर लाने की। उन्होंने डा.भीमराव अम्बेडकर के व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए कहा कि उन्हें बेहतर शिक्षक मिला,जिन्होंने डा.भीमराव के व्यक्तित्व को निखारकर सामने लाने का कार्य किया। राष्ट्रपति ने कहा कि भीमराव आंबेडकर ने अपने अध्यापक से आशीर्वाद की याचना की तो उक्त अध्यापक ने अपना उपनाम आंबेडकर सदा के लिए उन्हें दे दिया। साधारण परिवार से निकल एक सफल वैज्ञानिक और भारत के राष्ट्रपति बनने वाले डाॅक्टर कलाम का पूरा जीवन शिक्षा और शिक्षक के महत्व की एक जीती जागती कहानी है। शिक्षा का इतिहास महामना मदन मोहन मालवीय के बिना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि महान विद्वान चाणक्य का उदाहरण सबके सामने है, उनका योगदान सभी शिक्षकों के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि देश ज्ञान देने के साथ-साथ संस्कारों के बीज बोना शिक्षकों की जिम्मेदारी है। प्रेम और संस्कार भी वही शिक्षक दे सकता है। जिसमें स्वयं त्याग और संवेदनशीलता मौजूद हमारे देश में आदर्श शिक्षकों के अनेक उदाहरण उपलब्ध है। विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की अपनी प्रतिभा द्वारा वही प्राचार्य और बाद में कुलपति बने और अंततः मौर्य साम्राज्य के निर्माता और महामात्य बने। उच्च शिक्षा में गुणवत्ता के लिए राष्ट्रपति ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार विदेशों में इंडोलाॅजी का अध्ययन कराया जा रहा है, वैसे ही रशियन स्टडीज, जर्मन स्टडीज, फ्रेंच स्टडीज जैसे सेंटर भारत में भी खोले जाएं। उन्होंने उम्मीद जताई की मानव संसाधन विकास मंत्रालय इस दिशा में पहल करेगा। उन्होंने आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस ज्ञान महाकुम्भ से सार्थक और उच्च शिक्षा के लिए गुणवत्ता परक बातें निकलकर सामने आयेगी। इससे पूर्व प्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्रीमती बेबीरानी मौर्या ने भी सबोंधित करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन से निश्चित ही देवभूमि से उच्च शिक्षा के लिए उपयोगी बातें मिलेगी, जिससे उच्च शिक्षा के क्षेत्रा में शोध् और अनुसंधन को बढ़ावा मिलेगा। इस दो दिवसीय आयोजन में 18 राज्यों के उच्च शिक्षामंत्राी व उच्च शिक्षा सचिव और 131 विश्वविद्यालयों के कुलपति भाग ले रहे हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा योग में स्वामी रामदेव का योगदान अभूतपूर्व है। योग का अभ्यास पर्वतों कंदराओं और एकांतवास में जाकर किया जा सकता था, उन्होंने इसे घर घर पहुंचा दिया है। प्रति वर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाने का निर्णय लिया गया और इसे पूरे विश्व में मनाया जाता है। उत्तराखंड सरकार का यह महत्वपूर्ण और अच्छा प्रयास है। इस मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि देश की दशा व दिशा को बदलने के लिए ज्ञानकुंभ में मंथन होगा। साथ ही उच्च शिक्षा के क्षेत्र की दिक्कतो को दूर करने पर भी विचार होगा। कहा कि उच्च शिक्षा में भारत अभी अन्य देशों से पिछड़ा हुआ है। खासकर ग्रामीण भारत में शिक्षा की स्थिति में सुधर की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश में कुल 903 विश्वविद्यालय हैं। इनमें केवल 39 फीसद में ही शोध् होता है। 39 हजार महाविद्यालय में से केवल 40 फीसदी महाविद्यालयों में ही उच्च शिक्षा की व्यवस्था है। इन्हीं विषयों से संबंधित मामलों में ज्ञानकुंभ में चर्चा होगी। इस अवसर पर योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि शिक्षा के जरिये हमें भारत विश्व गुरु बनाना है। कहा कि इसी उद्देश्य ज्ञान कुंभ का आयोजन हुआ है। प्रदेश में अपनी तरह का यह पहला आयोजन है। ज्ञानकुंभ में पांच तकनीकी सत्रों को मिलाकर कुल नौ सत्र होंगे। समापन सत्रा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि होंगे। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा स्वास्थ्य के अलावा शिक्षा के क्षेत्र में भी पतंजलि महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ज्ञानकुंभ के माध्यम से उच्च शिक्षा के क्षेत्रा में गुणात्मक सुधार और नवीन विचारों का समावेश होगा। इस आयोजन से निकला संदेश भारतीय शिक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होगा। राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री धनसिंह रावत ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन के उददे्श्य पर प्रकाश डाला। समारोह में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डा.दिनेश शर्मा, नागालैंड के राज्यपाल बीपी आचार्य भी मौजूद रहे। इस मौके पर महामहिम तय समय दस बजकर 34 मिनट पर मंच पर पहुचे, उनके साथ उनकी धर्मपत्नी सविता कोविद भी साथ थी। मंच पर सबसे पहले राज्य के उच्च शिक्षामंत्री धनसिंह रावत पहुचे। उनके बाद यूपी के उपमुख्यमंत्री डा.दिनेश शिर्मा, नागालैंड के राज्यपाल बीपी आचार्य पहुचे, कुछ देर बाद मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत पहुचे, जबकि महामहिम और राज्यपाल एक साथ मंच पर पहुचे। महामहिम के मंच पर पहुचने पर राष्ट्रगान हुआ। महामहिम राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविद को स्मृति चिन्ह भेंट की, जबकि यूपी के उपमुख्यमंत्री को उच्च शिक्षामंत्री धनसिंह रावत ने स्मृति चिन्ह प्रदान किये।
