पीडित पक्ष ने पत्रकारों के सामने रखा अपना दर्द
मुकेश वर्मा/ अजय नेगी
हरिद्वार। प्रोपर्टी को लेकर गोल्डन बाबा के बीच चल रहे विवाद को लेकर आज पीडित ने प्रेस क्लब हरिद्वार में अपना दर्द पत्रकारों के समझ रखते हुए कहा कि उसने गोल्डन बाबा से बिल्केश्वर काॅलोनी स्थित मकान 75 लाख में खरीदा था, साथ ही मकान में रखे फर्नीचर सहित अन्य समान के भी छः लाख अतिरिक्त दिये गये थे। आरोप हैं कि गोल्डन बाबा के शिष्यों ने उनकी गैर मौजूगी में मकान का ताला तोड कर कब्जा कर लिया। जिसकी शिकायत दर्ज करायी गयी है, लेकिन मामले में शिथिलता बरतने पर डीएम से शिकायत करने पर कार्यवाही में तेजी आयी है। लेकिन गोल्डन बाबा ने प्रोपर्टी का सौदा करीब तीन करोड का बताते हुए मामले को उलझा दिया है। अमरजीत सिंह थापर निवासी 11/105 गीता काॅलोनी दिल्ली-31 व उसके बेटे गुरूप्रीत सिंह थापर ने प्रेस क्लब हरिद्वार पहुंचकर अपना दर्द पत्रकारों के समझ रखते हुए बताया कि उन्होंने गोल्डन बाबा से बिल्केश्वर काॅलोनी स्थित एक मकान को 75 लाख रूपये में खरीदा था। साथ ही उसमें रखा फर्नीचर व अन्य समान के छः लाख अतिरिक्त दिये। यह नगदी उन्होंने दिल्ली में दी उसके पश्चात गोल्डन बाबा ने उनको मकान की चांबी सौंप दी और 16 जुलाई को रजिस्ट्री करने का अश्वासन दिया। गुरूप्रीत सिंह ने बताया कि उसके पिता अमरजीत सिंह का 15 जुलाई को बर्थडे था, इसलिए वह 15 अगस्त को बिल्केश्वर काॅलोनी स्थित मकान पर पहुंचकर कब्जा ले लिया और उनका बर्थडे मनाया। गोल्डन बाबा से तय तिथि के अनुसार गोल्डन बाबा 16 जुलाई को हरिद्वार पहुंचे और मकान की रजिस्ट्री करा कर चले गये। उन्होंने बताया कि अचानक उसने पिता की तबीयत बिगड़ जाने पर उनको उपचार के लिए दिल्ली ले जाना पड़ा। और मकान में ताला लगा कर परिवार दिल्ली चला गया। इसी बीच उन्होंने दिल्ली से अपने नौकर को मकान की देखभाल करने के लिए हरिद्वार भेजा। जिसने फोन पर बताया कि मकान का ताला खुला था और उसमें कुछ लोग मौजूद थे। जिन्होंने उसको वहां से भगा दिया, इस मामले की शिकायत उन्होंने मेल के जरिये एसएसपी से की गयी। मगर कार्यवाही में तेजी नहीं आयी, जब जाकर उन्होंने हरिद्वार पहुंचकर डीएम से मिलकर पूरे मामले से अवगत कराया। डीएम के हस्तक्षेप से मामले में तेजी आयी। लेकिन वहीं गोल्डन बाबा ने इस मामले को यह कहते हुए उलझा दिया कि उनका प्रोपर्टी मामले में सौदा 2 करोड 91 लाख में तय हुआ था। जिसके एवज में उनको करीब डेढ करोड रूपया मिला है, शेष पैसा नहीं मिला है। जोकि गलत हैं ऐसा कोई सौदा उनके साथ नहीं हुआ और न ही उन्होंने गोल्डन बाबा को डेढ करोड दिया है। ना जाने गोल्डन बाबा ऐसा बयान देकर इस मामले को आखिर क्यों उलझाना चाहते है, उनकी मंशा क्या है।? चूंकि मामले में प्रशासन ने अपनी जांच शुरू कर दी है। लेकिन अभी हाल ही में 04 सितम्बर को नियत की गयी तिथि की सूचना जांच अधिकारी की ओर से उनको नहीं मिल पायी। सुना जा रहा हैं कि जांच अधिकारी ने गोल्डन बाबा के पक्ष में अपना फैसला सुना दिया है।
