

रात बिताने के लिए कांवडियों ने सर्वाजनिक स्थलों पर डाला डेरा
व्यापारी व स्थानीय नागरिक भी मेले में दे रहे प्रशासन को पूरा सहयोग
मुकेश वर्मा/ अजय नेगी
हरिद्वार। श्रावण मास कांवड मेला अपने पूरे यौवन पर है। कांवडियों की लगातार बढती भीड ने प्रशासन के हाथ पांव फुला दिये है। पुलिस प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत अब हाईवे पर लगा दी है। अब जबकि डाक कावंड भी शुरू हो गयी है। जिसकारण हाईवे पर यातायात व्यवस्था ना लड़खड़ाये इसको देखते हुए अब पूरा ध्यान प्रशासन का हाईवे पर है। वहीं पैदल कांवडियों को भी हाईवे से हटाकर उनको नगर पटरी मार्ग से भेजा जा रहा है। जिसमें मेले में तैनात पुलिस अधिकारियों व जवानों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। मगर पुलिस के अधिकारी व जवान अपनी ड्यूटी को बखूबी अंजाम देने में जुटे है। श्रावण मास कांवड मेले में लगातार कांवडियों की भीड बढती जा रही है। जिसको सम्भालने के लिए पुलिस के पसने छुट रहे है। प्रशासन मेले को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए स्थानीय नागारिकों, व्यापारियों, समाजिक संगठनों, विभिन्न राजनीतिक दलों सहित संतों से भी सहयोग ले रही है। व्यापार मण्डल के पदाधिकारी शहर की व्यापार की इकाईयों से कांवड मेले में प्रशासन को सहयोग देने की अपील कर रहा है। साथ ही कांवडियों के साथ मधुर व्यवहार करने के साथ-साथ किसी प्रकार का विवाद से बचने का अनुरोध् कर रहा है। वहीं व्यापारियों को अपने-अपने प्रतिष्ठानों तक पहुंचने के लिए तैनात पुलिस के जवानों के साथ किसी प्रकार का विवाद न खड़ा हो, इसके लिए भी पुलिस प्रशासन व व्यापार मण्डल की इकाईयों के पदाधिकारियों द्वारा समन्वय स्थापित कर काम कर रहा है। व्यापार मण्डल के पदाधिकारी शिवमूर्ति चैक, वाल्मिकी चैक, पोस्टआॅफिस तिराहे पर खड़े होकर व्यापारियों व स्थानीय नागारियों को उनके गतंव्य तक पहुंचाने के लिए तैनात पुलिस के जवानों का सहयोग कर रहे है। पंचक के बाद उमड़ी कांवडियों की भीड़ ने प्रशासन के होश जरूर उड़ाये है। कांवडियों की लगातार बढती भीड़ को देखते हुए एसएसपी कृष्ण कुमार वीके व डीएम दीपक रावत मेला क्षेत्र का भ्रमण कर अपनी व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए भीड़ के मुताबिक व्यवस्थाओं में फेर बदल कर रहे है। जिससे कांवडियों सहित स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का समाना न करना पड़े। कांवडियों के सैलाब के चलते शहर के भीतर होटल, लाॅज और धर्मशालाएं पूरी तरह फुल हो चुकी है। कांवडियों को ठहरने के लिए कमरे तक नहीं मिल पा रहे है। जिसकारण अब कांवडियों ने सर्वाजनिक स्थलों की ओर अपना रूख करते हुए उनको अपना बसेरा बना रहे है।
