मुकेश वर्मा
हरिद्वार। माघ मास का गंगा-स्नान आज पौष-पूर्णिमा पर विभिन्न प्रांतों से भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने हरकी पौडी समेत शहर के अलग-अलग गंगा घाटों पर स्नान करते हुए पुण्य अर्जित करते हुए परिजनों समेत अपने शुभचिंतकों की कुशलता की कामना की। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान करने के पश्चात मन्दिरों में पूजा अर्चना करते हुए मां मंशा देवी व मां चंडी देवी मन्दिर पहुंचकर मां के दर्शन कर आशीवार्द प्राप्त किया। पुलिस प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुरक्षा व व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किये गये थे।
मान्यता है कि माघ माह में देवता धरती पर आकर मनुष्य रूप धारण करते हैं और गंगा में स्नान करने के साथ ही दान और जप करते हैं। इसी लिए गंगा में स्नान का खास महत्व है। जहां स्नान करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है और पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी पिछले जन्मों के और इस जन्म के पाप धुल जाते हैं. जीवन में खुशहाली, सुख-समृद्धि आती है और सूर्य-चंद्रमा से जुड़े दोष दूर होते हैं।
मान्यता हैं कि पितरों की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान करने से उनकी आत्मा तृप्त होती है और उनका आशीर्वाद मिलता है। इस दिन अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, घी और धन का दान करना चाहिए, इस दिन अन्न-धन,तिल, गुड़ और घी का दान करना भी बेहद शुभ माना जाता है। भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और शिव जी की पूजा की जाती हैं, इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा करने का विशेष विधान है। इसके साथ ही स्वाध्याय का महत्व है। स्वाध्यय के दो अर्थ है। पहला स्वयं का अध्ययन करना और दूसरा धर्मग्रंथों का अध्ययन करना। स्वाध्याय का अर्थ है स्वयं का अध्ययन करना। अच्छे विचारों का अध्ययन करना और इस अध्ययन का अभ्यास करना है।
