मृतका किशोरी के माता-पिता की रिपोर्ट निगेटिव मिली
पीडित परिवार सहित शुभचिंतकों ने ली राहत की सास
उत्तंराचल पंजाबी महासभा करेगी भ्रमित करने वालों पर कानूनी कार्यवाही
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। मृतका किशोरी के माता-पिता जांच के लिए सैम्पल की रिपोर्ट निगेटिव मिली है। जिसके बाद पीडित परिवार सहित उनके शुभचिंतकों ने राहत की सास ली है। हरिद्वार प्रभारी मंत्री ने पूरे घटना का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिये है। साथ ही सीएमओ को मीडिया कर्मियों के फोन उठाने के निर्देश दिये है। वहीं मानवता को शर्मसार करने वाली घटना को चटकारे लगाकर लोगों को भ्रमित करने वालों के मुंह पर चाटा लगा है। जिन्होंने ऐसे वक्त में जब पीडित परिवार को उनके सहानुभूमि की जरूरत थी, मगर स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोराटाइन के स्टीगर लगाने को लेकर पर अनाप-शनाप लिखकर सोशल मीडिया में प्रसार किया था। अब उनके खिलाफ उत्तराचंल पंजाबी महासभा कानूनी कार्यवाही करने जा रही है। बताते चले कि योगी विहार ज्वालापुर निवासी अनूप कुमार की बेटी को 24 मार्च को बुखार की शिकायत होने पर उनके द्वारा पडौसी महिला चिकित्सक डाॅ. अनु लूथरा के यहां पर उपचार कराया गया। लेकिन रविवार को किशोरी की तबीयत बिगड़ने पर महिला चिकित्सक ने बीमार को अपने हाॅस्पिटल में भर्ती न कर जिला अस्पताल भेज दिया था। पीडित पिता अनूप कुमार के अनुसार जिला अस्पताल के फ्रलू क्लीनिक में मौजूद चिकित्सकों ने भी उनकी बेटी को भर्ती करने से इंकार कर केवल जांच का पर्चा हाथ में थमा कर घर भेज दिया। लेकिन उनकी बेटी की हालत बेहद खराब थी। जिसको घर लेकर जाना सम्भव नहीं था, इसलिए वह अपनी बेटी को उपचार के लिए कनखल स्थित बंगाली अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां पर उन्होंने भी उसकी बेटी को भर्ती न कर वापस टेस्ट के लिए कहते हुए राजकीय मेला अस्पताल भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि वहां मौजूद महिला चिकित्सक ने उसकी बेटी का टेस्ट के लिए सैम्पल नहीं लिया और घर भेज दिया। जिसके बाद वह रानीपुर मोड स्थित एक मातृ छाया हाॅस्पिटल ले गया। जहां पर चिकित्सकों ने उसकी बेटी की हालत देखते हुए जाॅली ग्रांट ले लाने की सलाह दी। जब वह अपनी बेटी को जौली ग्रांट ले जाने लगे तो अचानक बेटी की सास उखड गयी और दोबारा मातृ छाया लेकर पहुंचा। जहां उनको बंगाली अस्पताल ले जाने की सलाह दी। बंगाली अस्पताल चिकित्सकों ने जांच के बाद बेटी को मृत घोषित कर दिया। पीडित पिता ने कहा कि अगर सरकारी या निजी अस्पताल चिकित्सक उसकी बेटी को भर्ती कर उपचार करते तो शायद बच सकती थी। उनकी बेटी कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं थी। जिसका खुलासा स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उसका और उसकी पत्नी के सैम्पल के जांच की रिपोर्ट से हुआ है। पर्यटन एवं सिचांई एवं हरिद्वार प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज ने अखबारों में छपी खबर का संज्ञान लेते हुए पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिये है। साथ ही मीडिया की शिकायत पर सीएमओं को फोन उठाने के भी निर्देश दिये है। इस घटना से क्षुब्ध् उत्तंराचल पंजाबी महासभा के अध्यक्ष अमर कुमार ने कहा कि बच्ची की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग टीम द्वारा सदेंह पर दाह संस्कार में शामिल होने वाले लोगों के घरों के बाहर कोराटाइन के स्टीगर लगाये गये थे। लेकिन कुछ लोगों ने समाज के लोगों को भ्रमित करते हुए सोशल मीडिया मेें घर के बाहर लगे कोराटाइन के फोटो खींच कर अनाप-शनाप लिखकर प्रचार कर मानसिक पीडा पहुंंचाकर समाज में छवि धुमिल करने का प्रयास किया गया। ऐसे लोगों ने मानवता को शर्मसार किया है। जबकि इस दुख की घड़ी में उनको परिवार के साथ सहानुभूति रखनी चाहिए थी। ऐसे लोगों के खिलाफ पंजाबी महासभा कानूनी कार्यवाही करने जा रही है।
