

भाजपा-काग्रेंसी के बागी प्रत्याशियों ने बिगाडा खेल
वार्ड 5 में चार प्रत्याशियों के इर्द गिर्द समीकरण धुम रहे
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। भाजपा प्रत्याशी को लाभ पहुंचाने के लिए काग्रेंस के एक दिग्गज नेता ने कमजोर प्रत्याशी उतारे जाने को लेकर वार्ड नम्बर 5 में चर्चाओं का बाजार गर्म है। क्षेत्र के वरिष्ठ काग्रेंसियों का आरोप हैं कि एक काग्रेंसी नेता का भाजपा प्रत्याशी लखन लाल चौहान चेहता है। इसलिए उसको लाभ पहुंचाने के लिए उसके सामने उन्होंने जानबूझ कर काग्रेंसी प्रत्याशी बलराम कडक को उतारा है।

जिसका क्षेत्र के लोगों में कोई पकड़ नहीं है। जिसको लेकर क्षेत्र के काग्रेंसियों में रोष व्याप्त है। जिन्होंने स्पष्ट किया हैं कि वह काग्रेंस प्रत्याशी के लिए काम नहीं करेगें। इसी रोष के चलते एक वरिष्ठ काग्र्रेंसी नेत्री उमा गुजराल ने काग्रेंस से बागवत कर निर्देलीय चुनाव मैदान में है। वहीं भाजपा से बागी निर्देलीय प्रत्याशी अनिल वशिष्ठ भी चुनावी मैदान में है। जिन्होंने दिग्गज काग्रेंसी नेता के मनसूबों पर पानी फेरते हुए उनका पूरा खेल ही बिगाड़ दिया है। जिनकी स्थिति क्षेत्र में पार्टी मतदाताओं में मजबूत बतायी जा रही है।

बताते चले की इन दिनों शहर के भीतर निकाय चुनाव की बियार चल रही है। जहां पर राजनीति दलों सहित निर्देलीय प्रत्याशी चुनावी मैदान में है। लेकिन निकाय चुनाव में पार्षद पद पर प्रत्याशियों की जीत पार्टी बेस पर कम बल्कि व्यक्तिगत सम्बंधों के आधार पर टिकी होती है। जिन्होंने क्षेत्र के विकास में कार्य करते हुए लोगों की समस्याओं का समाधान कराया हो, उसको क्षेत्र के लोग वोट करते है। लेकिन इस बार निकाय चुनाव में काग्रेंस नेताओं पर जिताओं प्रत्याशियों की जगह अपने निकट के लोगों को टिकट देकर चुनाव में उतारे जाने का आरोप लग रहे है। जिसको लेकर वार्ड नम्बर 5 के काग्रेंसियों में भारी रोष देखा जा रहा है।

आरोप हैं कि एक काग्रेंसी नेता ने अपने चेहते भाजपा प्रत्याशी लखन लाल चौहान को लाभ पहुंचाने के लिए उसके सामने जानबूझ कर हलका प्रत्याशी बलराम कड़क को उतारा है। जिसकी क्षेत्र के लोगों में कोई पकड़ नहीं है। इसी बात से नाराज एक वरिष्ठ काग्रेंसी नेत्री उमा गुजराल ने पार्टी से बागवत कर निर्देलीय चुनाव लड रही है। उमा गुजराल का आरोप हैं कि उन्होंने पार्टी में करीब 35 साल तक सक्रियता निभाई है। लेकिन उनको सम्मान देने की बजाय काग्रेंसी नेता ने एक ऐसे व्यक्ति को टिकट देकर काग्रेंस का प्रत्याशी बना दिया। जिसका काग्रेंस से कोसो दूर तक कोई सम्बंध् नहीं है। काग्रेंस में अब कर्मठ व ईमानदार व मेहनती कार्यकत्र्ताओं की कोई जगह नहीं है।

माना जा रहा हैं कि उमा गुजराल की पकड़ काग्रेंस के वोटों वोटों पर है। जोकि कही न कही काग्रेंस को नुकासान पहुंचायेगी। ऐसे ही क्षेत्र के कई अन्य काग्रेंसी नेताओं सहित कार्यकत्र्ताओं ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह क्षेत्र में काग्रेंसी प्रत्याशी के लिए काम नहीं करेगें। एक काग्रेंसी नेता ने अपने निजी सम्बंधों को महत्व देते हुए पार्टी का हित नहीं सोचा है। लेकिन बदलती राजनीति परिस्थितियों ने काग्रेंसी नेता के मनसूबों पर पानी फेर दिया है। भाजपा से बागी प्रत्याशी अनिल वशिष्ठ भी वार्ड नम्बर 5 से निर्देलीय प्रत्याशी है। जिसका भाजपा वोटों पर अच्छी खासी पकड़ हैं जोकि भाजपा के प्रत्याशी को कही न कही नुकसान जरूर पहुंचा सकते है। अब जबकि काग्रेंस और भाजपा के बागी प्रत्याशी निर्देलीय तौर पर चुनावी मैदान में है। जिन्होंने भाजपा व काग्रेंस प्रत्याशियों की मुश्किले बढा दी है। देखा जाए तो वार्ड नम्बर 5 में कुल 7 प्रत्याशी चुनावी मैदान में बताये जा रहे है। लेकिन चुनावी समीकरण चार प्रत्याशियों के ही इर्द-गिर्द ही धुम रहे है। जिनमें भाजपा व काग्रेंस प्रत्याशियों के साथ उनके बागी प्रत्याशी शामिल है। मगर अभी तो चुनाव अपने पूरे जोर पर नहीं पहुंचा है। जैसे-जैसे चुनाव में तेजी आयेगी, वैसे-वैसी चुनावी समीकरण भी बदलते रहेगें।
