दोनों संतों ने दी अपने विरोधी धर्माचार्यों को शास्त्रार्थ की चुनौती
अगर चुनौती में पराजित होते हैं तो जीवित ही लेगें जल समाधि
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी और स्वामी अमृतानंद ने गंगा तट पर जल हाथ में लेकर धर्म संसद की आलोचना करने वाले सन्तो को शास्त्रार्थ की चुनौती दी डाली है। साथ ही उन्होंने घोषणा की हैं कि अगर चुनौती में वह पराजित होते हैं तो जीवित ही जल समाधि ले लेगेें। इस अवसर पर महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज ने बताया कि धर्म संसद को लेकर सनातन के कुछ संत अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं। ऐसे संत किसी न किसी राजनैतिक दल से जुड़े हुए हैं और उनकी निष्ठा धर्म के प्रति नहीं बल्कि अपने राजनैतिक आकाओं के प्रति है। हमें मर्यादाओं का पाठ पढ़ाने वाले आज कहाँ मुँह छिपाकर बैठे हैं, जब मुस्लिम मौलानाओं का विश्व का सबसे बड़ा संगठन जमीयते उलमाए हिन्द खुलकर बम विस्फोट से निर्दोष हिन्दुओं की हत्या करने वाले जिहादियों के पक्ष में खड़ा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हरिद्वार में बड़े-बड़े तथाकथित धर्म गुरुओं ने जमीयते उलमाए हिन्द के मौलानाओं को अपने मंचो पर बुलाकर महामंडित करने का काम किया है। ऐसे ही तथाकथित धर्मगुरुओं के कारण आज सनातन धर्म का सम्पूर्ण अस्तित्व खतरे में पड़ चुका है। इन तथाकथित धर्मगुरुओं के ये कार्य धर्म और शास्त्र के सर्वदा खिलाफ हैं। ऐसे ही लोग हमारे विषय मे दुष्प्रचार करके शत्रुओं के हाथ का खिलौना बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगो को हम दोनों सन्यासी रामायण, श्रीमद्भागवत, श्रीमद्भगवद गीता, कुरान और इस्लामिक इतिहास के आधार पर शास्त्रार्थ की चुनौती देते हैं। यदि हम धर्म पर आए हुए इतने विकट संकट को देखकर भी अनदेखा करते हैं तो यह धर्म के साथ विश्वासघात होगा।
उन्होंने कहा कि अपने आप को धर्मिक समझने वाले प्रत्येक सनातनी को इस समय अपने व्यक्तिगत, सम्प्रदायगत, जातिगत व संस्थागत अहंकारों और स्वार्थों को छोड़कर धर्म की रक्षा के लिये खड़ा होना चाहिये। जो ऐसा नहीं करता, वह स्वयं को धर्मिक कहलाने का अधिकारी नहीं है। आज इसी सिद्धांत पर शास्त्रर्थ के लिये हम दोनों संत अपने सभी विरोधियों को चुनौती दे रहे हैं। यह शास्त्रर्थ हरिद्वार में माँ गंगा के तट पर होगा। जिसमें यदि हम दोनों पराजित होते हैं तो माँ गंगा की गोद मे जलसमाधि ले लेंगे। उन्होंने कहा कि इस शास्त्रर्थ का प्रसारण पूरी दुनिया मे होगा और हिन्दू समाज ही इसमें हार जीत का निर्णय करेगा।
इस मौके पर महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज व स्वामी अमृतानंद महाराज के संकल्प लेते समय स्वामी शैव शून्य, विक्रम सिंह यादव, सनोज शास्त्री, डाॅ. अरविंद वत्स अकेला, डीके शर्मा सहित अनेक गणमान्य भक्त उपस्थित रहे।
