♦दरोगाओं द्वारा वसूली गई लाखों की रकम वापस दिलाने व मुकदमा दर्ज कराने की मांग
♦पीडित ने एसएसपी, डीजीपी और राज्य मानवाधिकार से लगाई न्याय की गुहार
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। हत्या मामले में समझौते के लिए दबाब बनाने के लिए मुकदमा वादी पर जानलेवा हमला करने तथा रेप समेत अन्य झूठे मामले में फंसाने में नाकाम रहने पर विरोधियों ने अब पीडित के छोटे भाई को अपना निशाना बनाकर उसको भी झूठे मामले में घसीटने के लिए कोतवाली गंगनहर में एक मामला दर्ज कराया है।
आरोप हैं कि पहले विवेचक द्वारा मामला झूठा होने पर भी एफआर लगाने के नाम पर लाखों की रकम ऐठी गई। उसके बावाजूद इसी मामले की दोबारा जांच के नाम पर दूसरे विवेचक द्वारा भी मामले में एफआर लगाने के नाम पर लाखों की डिमांड करने के आरोप लग रहे है। जिसको लेकर पीडित एसएसपी के दरबार पहुंचा, एसएसपी के आदेश पर एसपी देहात ने मामले की जांच की, तो मामला सही पाया गया और दोनों दरोगाओं पर कार्यवाही करते हुए एसएसपी ने उनको लाईन हाजिर कर दिया। लेकिन पीडित अब अपने विरोधियों के साथ-साथ दोनों विवेचकों से ली गई लाखों की रकम वापस दिलाने और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग को लेकर एसएसपी हरिद्वार, डीजीपी उत्तराखण्ड, राज्य मनावाधिकार आयोग से न्याय की गुहार लगाई है।
निश्चय राणा पुत्र स्व. ब्रजपाल सिंह निवासी ग्राम निरपुडा दोघट बडौदा बागपत उत्तर प्रदेश ने बताया कि 29 नवम्बर 2012 को गांव के पीठ बाजार में दिनदहाडे उसके पिता ब्रजपाल सिंह की हत्या गांव के कुछ लोगों द्वारा राजनीति रंजिश के चलते कर दी थी। पिता की हत्या में सात लोगों को नामजद किया गया था। जिनमें पांच आरोपियों को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुना दी। जबकि दो जमानत के बाद फरार चल रहे है। जिसके बाद से पुलिस प्रशासन की ओर से उसको व परिवार को पुलिस सुरक्षा दी गयी है।
पीडित ने आरोप लगाया कि न्यायालय में मजबूत पेरवी होने के कारण हत्या में शामिल लोगों को बचाने के इरादे से विरोधियों द्वारा उसको जान से मारने की नीयत से फॉयरिंग भी की गई थी, जिसमें वह बाल-बाल बच गये। आरोप हैं कि हत्या में शामिल लोगों को बचाने और समझौता कराने के इरादे से उसपर लगातार दबाब बनाने का प्रयास किये जा रहे है। जिसके तहत विरोधियों द्वारा विभिन्न राज्यों में विभिन्न धाराओं में झूठे मुकदमें दर्ज करा कर किया जा रहा है। पीडित ने बताया कि विरोधियों द्वारा उसका मनोबल तोडने के लिए उसके खिलाफ 10 झूठे मुकदमें दर्ज करा चुके हैं। जिनमें हरिद्वार के कोतवाली रानीपुर में दर्ज मुकदमा भी शामिल है। पुलिस द्वारा निष्पक्ष जांच में मामले झूठे मिलने पर उन सभी झूठे मामलों में एफआर तक लगाई जा चुकी है।
श्री राणा ने बताया कि उसके बावजूद विरोधियों का हत्या में शामिल लोगाों को बचाने के लिए समझौते के लिए दबाब बनाने के लिए झूठे मुकदमें दर्ज कराने का सिलसिला अभी थमा नहीं हैं। इसी क्रम में विरोधियों द्वारा वर्ष 2023 में कोतवाली रानीपुर में साजिश के तहत शाइस्ता नाम की महिला के जरिये गैंग रेप का मुकदमा दर्ज कराया गया था। जिसमें उसके साथ गांव के ही दो युवकों को भी शामिल किया गया है। मुकदमें में उसको ईट का सप्लायर बताया गया है।
उन्होंने बताया कि जबकि वह एलएलबी का फाइनल का छात्र था और गांव में खेती करता है। जबकि गैंग रेप के मुकदमें दर्ज कराये गये थे, उनमें मुकदमा दर्ज कराने वाली महिलाओं को वह जानते तक नहीं थे। तत्कालीन एसएसपी हरिद्वार के निर्देश पर निष्पक्ष जांच कराई गयी और मामला झूठा पाया गया। जिसके बाद मामले में एफआर लगाई गयी।
पीडित ने बताया कि विरोधियों द्वारा उसको झूठे मामले में फंसाने में नाकाम रहने पर अब उन्होंने उसके छोटे भाई निवेश राणा को अपना निशाना बनाया है। घटना फरवरी माह 2023 का दशति हुए उक्त मुकदमा 05 माह बाद साजिश के तहत जुलाई 2023 में एक झूठा मुकदमा हरिद्वार की कोतवाली गंगनहर मेंदर्ज कराया गया। जिसके विवेचक द्वारा जांच के लिए उनको कोतवाली गंगनहर बुलाया गया था। पीडित ने विवेचक पर गम्भीर आरोप लगाया कि विवेचक द्वारा जानकर कि मामला झूठा हैं, उसके बावजूद उनके गाली गलौच करते हुए उसके छोटे भाई निवेश राणा को एनकांउटर में गोली मार कर गिरफ्तार करने की धमकी देकर डराया धमका कर उनसे मामले में एफआर लगाने के नाम पर 3 लाख 50 हजार रूपये के रूप वसूल कर 06 अक्टूबर 2024 को अंतिम रिपोर्ट प्रेषित कर दी थी।
निश्चय राणा ने बताया कि उनको फोन पर जानकारी मिली कि उक्त मामले में दोबारा जांच शुरू हो गयी है। जब दूसरे विवेचक ने उनको कोतवाली गंगनहर में बुलाया और कहा कि पूर्व विवेचक ने अंतिम रिपोर्ट लगाते समय मजबूत कार्यवाही नहीं की है। आरोप हैं कि दूसरे विवेचक ने मजबूत कार्यवाही करते हुए मामले को खत्म करने के एवज में 5 लाख की डिमांड की। इतना ही नहीं उनपर पहले वाले विवेचक की तरह उसके छोटे भाई को एनकाउटर में गिरफ्तार कर जेल भेजने की धमकी दीं। छोटे भाई का जीवन बचाने के लिए लिए 01 लाख रूपये दूसरे विवेचक को भी दिये गये थे।
पीडित का आरोप हैं कि दूसरा विवेचक उनपर 4 लाख की डिमांड करता रहा, इतना ही नहीं धमकी दी कि यदि किसी के सामने जुबान खोली तो तुमको भी किसी झूठे बलात्कार के केस में फंसा कर एनकाउटर में गोली मारकर जेल भेज देगा। पीडित का दावा हैं कि उसके पास विवेचको द्वारा झूठे मामले को ढाल बनाकर उनसे लाखों लिए गये, जिसके सम्बंध में उसके पास पुख्ता साक्ष्य मौजूद है। जिसमें पैसों के लेन देन की विडियों, आडियों व कुछ स्क्रीन शॉट शामिल है। इस प्रकरण को लेकर 21 जुलाई 2025 को तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार से मुलाकात कर सभी तथ्यों से अवगत कराते हुए साक्ष्य उपलब्ध कराए गए।
श्री राणा ने बताया कि तत्कालीन एसएसपी द्वारा पूरे प्रकरण की जांच एसपी ग्रामीण को सौपी गई। विवेचकों के द्वारा मामले में एफआर लगाने के नाम पर पैसों के लेनदेन के सम्बंध में सभी साक्ष्य उपलब्ध कराये गये। एसपी देहात की रिपोर्ट में दोनों विवेचकों को दोषी पाया गया। पीडित का दावा हैं कि दोनों दरोगाओं के खिलाफ कार्यवाही करते हुए दोनों को लाईन हाजिर किया गया। जिसकी जानकारी से तत्कालीन एसएसपी द्वारा उसको भी अवगत कराया गया।
पीडित ने पूरे मामले को लेकर एसएसपी हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर, डीजीपी उत्तराखण्ड समेत राज्य मानवाधिकार आयोग से जांच के नाम पर डरा धकमा कर वसूल की रकम वापस दिलाने और दरोगाओं के खिलाफ अपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई है। पीडित निश्चय राणा द्वारा पूरे प्रकरण को लेकर प्रेस क्लब हरिद्वार में 23 मार्च 26 को पत्रकार वार्ता कर दोनों दरोगाओं पर गंभीर आरोप लगा चुके है।


