■जनपद हरिद्वार में वर्ष 2023 का टीबी बीमारी से ग्रसित मरीजों का रिपोर्ट कार्ड
■टीबी के 6,690 मरीज, जिनमें अन्य जगहों से रैफर होकर पहुंचे 698 मरीज
■हरिद्वार में जांच में 5,992 लोगों में हुई टीबी की पुष्टि, करीब 123 मरीजों की हुई मौत
■जनपद में दो हजार से अधिक टीबी मरीजों के मददगार के रूप में काम रहे निक्षय मित्र
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। जनपद हरिद्वार में वर्ष 2023 में टीबी मरीजों के रिपोर्ट कार्ड पर अगर नगर डाले तो टीबी बीमारी को गम्भीरता से लेते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा उसके रोकथाम के लिए गम्भीरता से लेते हुए कारगर कदम उठाये गये है। टीबी बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के क्रम में भी जिला स्वास्थ्य विभाग सवेंदनशील दिखाई पड़ी। अगर जनपद में टीबी के मरीजों की संख्या पर नजर डाले तो वर्ष 2023 में टीबी के मरीज 6,690 थे। जिनमें अन्य प्रदेशों व जनपदों से रैफर होकर आये 698 मरीज भी शमिल है। जबकि जनपद हरिद्वार के भीतर जांच में 5,992 टीबी के मरीजों के मिलने की पुष्टि हुई।

वहीं वर्ष 2023 में टीबी बीमारी से करीब 123 लोगों की मौत भी हुई है। देश में टीबी बीमारी लाइलाज नहीं हैं बल्कि सफल उपचार सम्भव है। मगर लोगों को जागरूक रहने की आवश्यकता है। मरीजों को गोद लेने के लिए कुछ समाजिक संस्थाएं भी निक्षय मित्र बनकर सामने आये है। जिनके द्वारा गोद लेने वाले मरीजों को प्रति माह राशन कीट भी उपलब्ध कराई गयी, जोकि अभी जारी है। जबकि टीबी बीमारी से वर्ष 2023 में करीब 123 लोगो की मौत हुई है।
जिला क्षय रोग चिकित्सालय के चिकित्साधिकारी डॉ. शादब सिद्धकी ने बताया कि टीबी बीमारी लाईलाइज नहीं है। बीमारी को लेकर घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। देश में टीबी बीमारी का सफल उपचार हैं, मगर जरूरत हैं कि लोगों को होने वाली दिक्कतों के प्रति जागरूक रहकर अपनी जांच कराने की। टीबी बीमारी का उपचार देशभर में निःशुल्क है। जिसके टेस्ट से लेकर औषधी तक टीबी सेंटरों पर निःशुल्क होती है। केन्द्र सरकार की ओर से यदि कोई टीबी बीमारी से ग्रसित एक राज्य या जनपद से दूसरे राज्य में स्थान्तरित होता हैं तो मरीज को स्थान्तरित हुए जनपदों व प्रदेशों में भी निक्क्षा आईडी के जरिये वहां के टीबी सेंटरों से निःशुल्क दवा उपलब्ध करायी जाएगी।

चिकित्साधिकारी ने बताया कि जनपद हरिद्वार में वर्ष 2023 में टीबी मरीजों की संख्या 6,690 है। जिनमें अन्य जनपदों व प्रदेशों से रेफर होकर आये 698 मरीज भी शामिल है। जबकि जनपद हरिद्वार में जांच के दौरान 5,992 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई है। अगर हम मौजूदा वक्त में वर्तमान में टीबी मरीजों के उपचार की बात करें तो उनके टीबी सेंटर से 4100 टीबी के मरीजों का उपचार किया जा रहा है। वर्ष 2023 में करीब 123 टीबी मरीजों की मौत हुई है। जनपद हरिद्वार में वर्तमान में मौजूद टीबी मरीजों में 181 मरीज एमडीआर यानि मल्टी ड्रग प्रतिरोधी टीबी के मरीज भी शामिल है। अमूमन टीबी बीमारी का उपचार 6 माह का होता है, लेकिन एमडीआर बीमारी से ग्रसित मरीजों का उपचार डेढ से दो साल तक चलता है।
उन्होंने बताया कि टीबी मरीजों को उपचार के दौरान तक केन्द्र सरकार की ओर से प्रतिमाह 500 रूपये पोषण भत्ता उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा टीबी मरीजों की मदद के लिए जनपद हरिद्वार में कुछ संगठन, समाजिक संस्थाए निक्षय मित्र के तौर पर काम कर रही है। जनपद हरिद्वार में वर्ष 2023 में दो हजार से अधिक निक्षय मित्र टीबी मरीजों के लिए काम कर रहे है। निक्षय मित्र बने संगठन व समाजिक संस्थाए टीबी मरीजों को कुछ संख्या के आधार पर गोद लेते है। जिनको गोद लेने वाले निक्षय मित्र उनको प्रति माह प्रोटीन युक्त राशन कीट उपलब्ध कराते है।
डॉ. सिद्धकी ने बताया कि समय-समय पर जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किये जाते है। जिससे लोगों में टीबी बीमारी के प्रति गलत धारणा पैदा ना हो और टीबी बीमारी के सम्बंध में सही जानकारी देने का प्रयास किया जाता है। टीबी मरीजों की हर कोई व्यक्ति अपने स्तर से निक्षय मित्र बनकर उनकी मदद कर सकता है। जो व्यक्ति या संगठन या संस्था टीबी मरीजों की निक्षय मित्र बनकर मदद करना चाहते हैं, तो उनको जिला क्षय रोग चिकित्सालय बिल्केश्वर रोड़ ब्लड बैंक के समीप हरिद्वार पहुंचकर सम्पर्क कर सकता है।
