छतों पर पेड़-पौधों लगे गमले रखना व कपड़े सूखना किया बंद
नागरिकों को बंदरों के खौफ को लेकर भारी रोष
लीना बनौधा
हरिद्वार। शिवालिकनगर में इन दिनों बंदरों के आतंक से लोगों में खौफ देखा जा रहा है। बंदरों द्वारा घरों में घुसकर व छतों पर पहुंचकर पेड़—पौधे लगे गमलों व सूखाने के लिए डाले गये कपड़ों को नुकसान पहुंचा रहे है। बंदरों को भगाने की कौशिश पर लोगों को भी अपना शिकार बनाकर उनको जख्मी कर रहे है। बताया जा रहा हैं कि बंदरों के सम्बंध में सम्बंधित विभाग से शिकायत करने पर भी नागरिकों को कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। जिसको लेकर लोगों में भारी रोष है।
शिवालिकनगर में इन दिनों बंदरों का खौफ बना हुआ है। जिसके चलते लोगों ने घरों को खुला छोड़ना व छतों पर कपड़े सूखाने समेत पेड़—पौधे लगे गमले लगाना छोड़ दिया है। बताया जा रहा हैं कि अक्सर बंदर किसी भी वक्त खुले घरों में घुसकर सामने कोई समान दिखता हैं उसको लेकर भाग निकलते है। यदि उनको भगाने की कौशिश की जाती हैं तो बंदर उनको घुड़की देते हुए उनपर हमला कर जख्मी कर रहे है। ऐसे ही छतों पर पेड़—पौधे लगे गमले या फिर सूखाने के लिए डाले गये कपड़ों को भी नुकसान पहुंचा रहे है। जिसकारण नागरिकों ने छतों पर कपड़े सूखाने व पेड़ पौधे लगे गमले रखना तक छोड दिया है।
बताया जा रहा हैं कि शिवालिक नगर के नागारिकों ने बंदरों के आंतक से निजात दिलाने के लिए सम्बंधित विभाग से शिकायत की गयी, लेकिन कोई राहत लोगों को मिलती नजर नहीं आ रही है। शिवालिकनगर के नागरिकों का हताश होकर कहना हैं कि आखिर वह बंदरों से निजात दिलाने की किस से शिकायत करे, ताकि उनको बंदरों के खौफ से निजात मिल सकें। उनको समझ नहीं आ रहा हैं जिनकी जिम्मेदारी हैं वह अपनी जिम्मेदारी को नहीं समझ रहे है। देखा जाए तो इन दिनों शिवालिकनगर के नागरिक बंदरों के आतंक से खौफजादा है। बंदरों के आतंक से निजात न मिलने पर उनमें भारी रोष व्याप्त है।

