लोनिवि अधिशासी अभियंता गिरफ्रतारी मामला
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। लोक निर्माण विभाग अधिशासी अभियंता की गिरफ्रतारी मामले में एक चौका देने वाला मामला प्रकाश में आया है। कुछ पत्रकारों ने अधिशासी अभियंता से किसी भी अखबार में खबर ना छपने के नाम पर तीन लाख रूपये की डिमांड कर सेंटिग करने का प्रयास किया। पत्रकारों ने भरोसा दिलाया था कि वह मीडिया को वह मेनेज कर लेगें। मगर उनके अरमान सिरे नहीं चढ सकें। बताया जा रहा हैं कि पत्रकारों की नजर बराबर इसी बात पर लगी रही कि खबर किसी तरह बाहर न जाने पाये। लेकिन कोतवाली से बाहर खबर जाने के बाद उनका रायता बिखर गया। बताते चले कि गत दिनों लोक निर्माण विभाग अधिशासी अभियंता द्वारा नशे में धुत होकर लोगों से अभ्रता करने तथा अपनी लाईसेंसी रिवाल्वर से लोगों को डराने की शिकायत नगर कोतवाली पुलिस को मिली थी। जिसपर पुलिस ने कार्यवाही करते हुए नशेडी अधिशासी अभियंता को धर दबोचा था। जिसकी भनक कुछ पत्रकारों को लगी, जिन्होंने कोतवाली पहुंचकर अधिशासी अभियंता से सम्पर्क साध कर उनके खिलाफ खबर को मीडिया में न छपने के एवज में तीन लाख की डिमांड कर डाली। बताया तो यह भी जा रहा हैं कि पत्रकारों की नजर लगातार इसी बात पर लगी रही कि खबर कोतवाली से बाहर न जाने ना पाये। कहा तो यह भी जा रहा हैं कि अधिशासी अभियंता अपनी इज्जत के खातिर कुछ पैसा देने के लिए भी राजी भी हो गया था। मगर ऐन वक्त पर पत्रकारों के मनसूबों पर पानी फिर गया, जब मामले की जानकारी मीडिया को लग गयी। जिन्होंने कोतवाली से घटना की जानकारी ली। पुलिस ने उसके बेटे के पहुंचने पर अधिशासी अभियंता को कोतवाली से जमानत दे दी। जिसको लेकर कुछ हाथ न लगने पर पत्रकारों के चेहरे लटक गये और पुलिस की कार्यशैली पर ही प्रश्नचिन्ह लगाना शुरू कर दिया। इस प्रकरण को लेकर पत्रकार जगत सहित शहर में उन पत्रकारों की अच्छी खासी चर्चा की जा रही है।
