इमरजेंसी में चल रहे गड़बड़ झाले में ईएमओं व फार्मेसिस्ट पर लग रहे आरोप
गड़बड़ झाले की जानकारी पर पीएमएस की चुप्पी पर खड़े हो रहे सवाल
सीएमओ डॉ. मनीष दत्त मामले पर दिखाई गम्भीरता, पीएमएस को लिखेगे पत्र
सीएमओ ने मेडिकोलिगल पर इमरजेंसी के लिए निर्देशित बनवाये साईन बोर्ड
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। जिला अस्पताल इमरजेंसी में मेडिकोलिगल मामले में पीडितों को परेशान करने तथा उनपर पुलिस चिट्ठी लाने का दबाब बनाकर उनसे सुविधा शुल्क लेने के आरोपों का मामला समय-समय पर सामने आता रहा है। ऐसा नहीं इस आरोपों की जानकारी पीएमएस को नहीं है। लेकिन उसके बावजूद ऐसे आरोपों पर कोई एक्शन होता नजर नहीं आ रहा है। ऐसा ही एक मामला गुरूवार को एक बार भी प्रकाश में आया है। पीडित व्यापारी का बेटा मारपीट में घायल उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचा, जहां पर उपचार तो किया गया, लेकिन उसका प्राईवेट मेडिकोलिगल यह कहते हुए इंकार कर दिया कि पुलिस से चिट्ठी लेकर आओ तभी मेडिकल बनेगा। यह केवल एक पीडित की कहानी नहीं हैं, बल्कि ना जाने दिनभर में कितने ऐसे मारपीट व दुर्घटना में घायल पीडित उपचार के लिए पहुंचते होगे, जोकि पहले ही परेशान हैं।

आरोप हैं कि उनको ईएमओ व फार्मेसिस्ट यही जबाब देकर ओर परेशान कर सुविधा शुल्क देने के लिए मजबूर किया जाता है। लेकिन अब जिला अस्पताल की इमरजेंसी में हो रहे ऐसे गडबड़ झाले पर सीएमओ ने गम्भीरता दिखाई है। जिन्होंने पीएमएस को ऐसी शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए एक्शन लेने को एक पत्र प्रेषित करने की बात कही है। वहीं मेडिकोलिजगल से सम्बंधित साईन बोर्ड बनवाकर इमरजेंसी के भीतर व बाहर लटकाने की बात कही है।
बता दें कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी पर लाखों रूपये खर्च कर उसका विस्तारिकरण कर संसाधनों से सुसज्जित कराते हुए वहां की व्यवस्था को दुरूस्थ करने के दावे भले ही पीएमएस डॉ. सीपी त्रिपाठी कर रहे हो, लेकिन सच्चाई दावों से बहुत परे है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में चल रहे गड़बड़ झाले की जानकारी शहर में आम चर्चा में है। ऐसा नहीं इमरजेंसी में मेडिकोलिगल बनाने में चल रहे गड़़बड़ झाले की जानकारी पीएमएस डॉ. सीपी त्रिपाठी को नहीं है। जबकि जिला अस्पताल में मेडिकोलिगल की व्यवस्था हैं कि मेडिकल दो तरीके से बनाये जाते हैं एक एमएलपीसी यानि घायल को पुलिस चिट्ठी लेकर खुद मेडिकल कराने के लिए पहुंचती है, जोकि निशुल्क होता है। वहीं दूसरा तरीका एमएलवीसी यानि बिना पुलिस की चिट्ठी के प्राईवेट के तौर पर मेडिकल अस्पताल का निर्धारित शुल्क देकर होता है।
जिला अस्पताल द्वारा बनाये गये नियम कायदों को दरकिनार कर इमरजेंसी में तैनात ईएमओ व फार्मेसिस्ट अपने लाभ के लिए तार-तार कर रहे है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में ईएमओ डॉ. दीपक पाण्डे और फार्मेसिस्ट पीसी रतूड़ी की मनमानी का एक मामला आज प्रकाश में आया है। विष्णु घाट हरिद्वार के व्यापारी लक्ष्मण सिंह नेगी का बेटा सार्थक नेगी हमले में घायल उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया। व्यापारी के बेटे के चेहरे व सिर पर चोटे थी। घायल का उपचार तो कर दिया गया, लेकिन मेडिकल बिना पुलिस की चिट्ठी के करने से इंकार कर दिया। आरोप हैं कि ईएमओ डॉ. दीपक पाण्डे व फार्मेसिस्ट पीसी रतूड़ी ने पीडित पर मेडिकल के लिए पुलिस की चिट्ठी लाने का दबाब डाला गया। जब उनके द्वारा प्राईवेट में शुल्क लेकर मेडिकल बनाने की बात ही गयी तो ईएमओ व फार्मेसिस्ट पीसी रतूड़ी ने अपनी मनमानी करते हुए एक नहीं सुनी। बता देें कि डॉ. दीपक पाण्डे पर कोरोना की पहली लहर वर्ष 2020 में लापरवाही बरतने का आरोप लग चुका है। जिसमें गम्भीरता ना दिखाने पर एक किशोरी की जान चली गयी थी।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में चल रहे गड़बड़ झाले के सम्बंध में सीएमओ हरिद्वार डॉ. मनीष दत्त से सम्पर्क कर जानकारी दी गयी। सीएमओ डॉ. मनीष दत्त ने बताया कि इजरजेंसी में मेडिकोलिगल मामले में चल रहे गड़बड़ झाले की शिकायतें उनको मिल चुकी है। जिसके संज्ञान पर उन्होंने जिला अस्पताल पहुंचकर इमरजेंसी का निरीक्षण करते हुए पीएमएस डॉ. सीपी त्रिपाठी और इमरजेंसी में तैनात ईएमओ व फार्मेसिस्ट को शिकायतों की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी पर उनकी पैनी नजर हैं और वह समय-समय पर औचक निरीक्षण भी करेगें। पीएमएस को एक पत्र इमरजेंसी में मेडिकोलिगल के नाम पर चल रहे गडबड़ झाले पर अंकुश लगाने तथा शिकायत मिलने पर एक्शन लेने के लिए प्रेषित किया जाएगा। इसके अलावा उनके कार्यालय की ओर से साईन बोर्ड बनवाये जा रहे है।जिसमें इमरजेंसी में बनने वाले मेडिकोलिगल के सम्बंध में निर्देश लिखे जाएगे।
सीएमओ ने बताया कि साईन बोर्ड में स्पष्ट लिखा होगा कि मारपीट व दुर्घटना के प्राईवेट मेडिकोलिगल निर्धारित शुल्क देकर कराया जा सकता हैं, यदि कोई चिकित्सक या फार्मेसिस्ट समेत अन्य कर्मी दबाब डालकर सुविधा शुल्क की डिमांड करता हैं तो उसकी लिखित में शिकायत पीएमएस या चिकित्साधिकारी समेत सीएमओ हरिद्वार को तत्काल करें। साईन बोर्ड में मोबाइल नम्बर भी अंकित किये जाएगे। जिला अस्पताल की इमरजेंसी की शिकायतों को लेकर वह अति गम्भीर है, हर शिकायतों पर उनकी पैनी नजर है। मेडिकोलिगल मामले में शिकायत पर जांच के बाद दोषी पाये जाने पर सम्बंधित के खिलाफ विभागीय कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
