आरोपः सीएमएस अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं अस्पताल
आपातकालीन सेवा बंद रखने की दी जा रही अजीबों-गरीब दलील
उदासीनता को छुपाने के लिए चिकित्सकों की कमी का रोना रोया जा रहा
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। मेला अस्पताल में आपातकालीन सेवा पिछले 13 मार्च से बंद होने के कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जबकि हॉस्पिटल के लिए आपातकालीन सेवा अतिमहत्वपूर्ण सेवाओं में एक है। जोकि मौजूदा सीएमएस की उदासीनता के चलते ठप्प पड़ी है। आपातकालीन सेवा बंद रखने की दलील भी बड़ी अजीबों-गरीब दी जा रही है। जिसमें कहा जा रहा हैं कि कुछ संविदा में तैनात चिकित्सक कार्य छोड़ कर जा चुके है और कुछ चिकित्सक छुट्टी पर चल रहे है। जिसकारण आपातकालीन सेवा बंद रखी गयी है। आरोप हैं कि शासन के नियमों को ताक पर रखकर सीएमएस साहब अपने हिसाब से अस्पताल चलाना चाहते हैं। मेला अस्पताल में आपातकालीन सेवाओं को 01 मार्च से शुरू किये जाने की बात कही जा रही है।
बताया जा रहा हैं कि मेला अस्पताल में केवल तीन चिकित्सक ही संविदा पर तैनात है। जिनमे एक महिला चिकित्सक काम छोड़ कर जा चुकी है, जबकि अभी दो चिकित्सक कार्यरत है। जिनमें एक मनोचिकित्सक एनएचएम से हैं, तो दूसरे पैथोलोजिस्ट है। अगर इन दोनों चिकित्सकों की बात की जाए, तो दोनों ही चिकित्सकों का आपातकालीन सेवाओं को कोई सरोकार नहीं है। आरोप हैं कि अगर माक्रोबाइलॉजिस्ट चिकित्सक को छोड़ दिया जाए, तो तीन स्थायी चिकित्सक ऐसे है, जिनसे मेला अस्पताल में कोई सेवाएं नहीं ली जा रही है।
बताते चले कि हरिद्वार शहर में सरकारी तीन चिकित्सालय जिला अस्पताल, मेला अस्पताल और महिला अस्पताल है। जिनकी अपनी-अपनी महत्ता है। पिछले दिनों जिला अस्पताल की आपातकालीन सेवा कक्ष का विस्तारिकरण को लेकर 30 दिसम्बर 22 से 12 मार्च 23 तक के लिए शिफ्ट की गयी थी। जिला अस्पताल में आपातकालीन कक्ष का विस्तारिकरण पूरा होने पर 13 मार्च को शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन 13 मार्च से जिला अस्पताल की आपातकालीन सेवा शिफ्ट होने के बाद मेला अस्पताल की आपातकालीन सेवा पूरी तरह ठप्प पड़ी है। बताया जा रहा हैं कि मेला अस्पताल के सीएमएस के द्वारा आपातकालीन सेवा कक्ष दरवाजा बंद करवा दिया गया है, जोकि अभी तक बंद पड़ा है।
जब इस सम्बंध में सीएमओ हरिद्वार डॉ. मनीष दत्त से फोन पर सम्पर्क करने का प्रयास किया गया। लेकिन उनका फोन नहीं उठ सका। लेकिन पता चला कि उनका स्वास्थ्य खराब चल रहा है। जिसकारण सीएमओ का चार्ज फिलहाल अपर सीएमओ डॉ. आरके सिंह देख रहे है। अपर सीएमओ डॉ. आरके सिंह से फोन पर सम्पर्क कर मेला अस्पताल की आपातकालीन सेवा बंद होने के मामले के सम्बंध में जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया। जिन्होंने इसकी जानकारी ना होने और मेला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजेश गुप्ता से जानकारी लेकर देने की बात कही गयी।
अपर सीएमओ डॉ. आरके सिंह ने बताया कि सीएमएस डॉ. राजेश गुप्ता का कहना हैं कि कुछ संविदा चिकित्सक काम छोड़ कर जा चुके हैं और कुछ छुट्टी पर चल रहे है। जिसकारण चिकित्सकों की कमी होने के कारण आपातकालीन सेवा बंद करनी पड़ रही है। लेकिन आपातकालीन सेवाओं को 01 अप्रैल से शुरू कर दिया जाएगा। सीएमएस द्वारा अपनी उदासीनता को छुपाने के लिए अजीबो-गरीब दलील दी जा रही है। जबकि मेला अस्पताल में तीन चिकित्सक की संविदा पर कार्यरत है। जिनमें एक महिला चिकित्सक डॉ. करिश्मा काम छोड़ कर जा चुकी है। लेकिन अभी भी दो चिकित्सक कार्यरत है। जिनमें मनोचिकित्सक डॉ. राजीव रंजन तिवारी और पैथोलोजिस्ट डॉ. संदीप गुप्ता है। जिनका आपातकालीन सेवाओं से कोई सरोकार नहीं है। इनके अलावा मेला अस्पताल में तैनात चिकित्सक स्थाई है। जिनमें तीन चिकित्सकों को छोड़ कर सभी चिकित्सक ओपीडी में अपनी सेवाएं दे रहे है।
बताया जा रहा हैं कि इनमें एक चिकित्सक अपनी शादी के चलते एक माह की छुट्टी पर थे और दूसरे चिकित्सक 15 दिनों की टेªनिंग पर थे। लेकिन दोनों चिकित्सकों के वापसी ड्यूटी पर हो चुकी हैं उसके बाद भी आपातकालीन सेवाएं शुरू नहीं कराई जा सकी है। वहीं सीएमएस अपनी उदासीनता को छुपाने के लिए चिकित्सक की छुट्टी व दूसरे चिकित्सक के टेªनिंग की आड़ लेकर अपनी जिम्मेदारियों से बचने का प्रयास कर रहे है। आरोप हैं कि शासन के नियमों को ताक पर रखकर सीएमएस अपने हिसाब से अस्पताल चलाना चाहते हैं। जिसको जिलाधिकारी, सीएमओ हरिद्वार को गम्भीरता से लेते हुए मामले की जांच की जानी चाहिए, जिससे सच्चाई सामने आ सके।
