लीना बनौधा
हरिद्वार। ज्योतिषाचार्य पं0 विजय कुमार जोशी ने बताया कि भारतीय संस्कृति पुनर्जन्म एवं कर्म के सिद्धांत पर आधारित है, मैने बहुत से लोगों को ये कहते सुना हैं कि भाग्य कुछ नही होता और ये भी कहते है कि किस्मत में जो लिखा है, वो होकर रहेगा। लेकिन मेरा मानना है हमें जो भी भौतिक सुख, सम्पदा और वैभव प्राप्त होता है,वह भाग्य से ही होता है, जैसे राबड़ी देवी बिहार की मुख्यमंत्री बनी ये उनका भाग्य था। डॉ0 मनमोहन सिंह भारत के प्रधानमंत्री बने ये उनका भाग्य था, उनकी कुंडली में राजयोग था।
एक बार पत्रकार के जवाब में स्वयं मोदी जी ने कहा था की उन्होंने कभी जीवन मे मॉनिटर का चुनाव लड़ने की भी नही सोची थी। क्या लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी इनके कर्म में कोई कमी रही प्रारब्ध ( भाग्य ) का सम्बन्ध कई जन्मों का होता एक अरबपति निसन्तान दम्पत्ति को कूड़े के ढेर में एक बच्चा मिला। उन्होंने ईश्वर का प्रसाद मानकर उसका पोषण किया और बच्चे ने समस्त सुख भोगे और आने वाले समय पर उनका उत्तराधिकारी बना।
उन्होंने बताया कि यहां बच्चे का न तो जन्म महान था और नही कर्म सिर्फ भाग्य प्रबल था, किसी भी मनुष्य का कोई कर्म नष्ट नही होता मनुष्य को हर कर्म का फल अवश्य मिलता है। इसी लिये मनुष्य जन्म-जन्मांतर के चक्रव्यूह में फंसा रहता है। जिस नियत से कर्म होता है, उसी नियत से फल मिलेगा और भाग्य बनेगा कोई भी मनुष्य अकर्मण्य नही हो सकता! कर्म तो उसे करना पड़ेगा ये कर्म ही प्रारब्ध ( भाग्य ) का निर्माण करते है, दुनिया के लाखों पेड़ गिलहरियों की देन है, वो अपनी खुराक के लिये बीज जमीन में छिपा देती है और फिर जगह भूल जाती है अच्छे कर्म करिये और भूल जाईये समय आने पर फलेंगे जरूर…
पं0 विजय कुमार जोशी
मोती ज्योतिष केंद्र , हरिद्वार
