जानकारों ने भाजपा के इशारे पर मेयर के कार्यक्रम को पलीता लगाने की राजनीति से जोडा
मेयरपति पार्टी के नेता के असहयोग के चलते खिन्न नजर आये
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। नगर निगम में मेयर का कार्यालयों में ताला बंदी का कार्यक्रम अपने ही कांग्रेसी नेताओं के दबाव के चलते टांय-टांय फिश हो गया। भले ही नगर निगम के कार्यालयों में ताला बंदी को टालने की वजह की दलील जनता को होने को होने वाली परेशानियों को देखते हुए निर्णय बदलने की बात कही जा रही है। मगर कुछ राजनीतिक जानकार इसको कांग्रेसी खेमे में भाजपा की सेंध लगाने से जोड कर देख रहे है और भाजपा के इशारे पर मेयर के कार्यक्रम को पलीता लगाने की राजनीति से जोडा जा रहा है। बताते चले कि नगर निगम हरिद्वार में मेयर कांग्रेसी होने के कारण भाजपा और कांग्रेस के बीच छत्तीस का आंकडा बना हुआ है। दोनों पाटियां एक-दूसरे पर आरोप लगाने से नहीं चुक रही है, चाहे मामला भ्रष्टाचार को लेकर हो या फिर व्यवस्था को लेकर दोनों पाटियों के पार्षदों के बीच तलवार खिंची हुई है, बस मौका मिलना चाहिए। शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर एक लम्बे समय से केआरएल कम्पनी को लेकर दोनों पाटियों के पार्षदों के बीच आरोपों की जंग जारी है। मेयर अनीता शर्मा का आरोप हैं कि नगर निगम के नगर आयुक्त द्वारा उनकी नहीं सुनी जा रही है। जनता से चुनी होने के बावजूद भी नगर निगम अधिकारी उनकी पूर्ण उपेक्षा कर रहे है। जोकि स्थानीय विधायक एवं शहरी विकास मंत्री की शह पर किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर भाजपा पार्षद भी मेयर पति पर नगर निगम को नहीं चलने देना नहीं चाहते और मेयर साहिबा अपने पति के दवाब में असहाय नजर आ रही हैं। मेयरपति अशोक शर्मा नगर निगम के कार्यों में दखलांदाजी कर अराजकता फैलाने का कार्य करने का आरोप लगा रहे है। यह सब नगर निगम हरिद्वार में चल रहा है। हाल ही में कनखल स्थित सती घाट पर चल रही एक पार्किग को लेकर मेयर अनीता शर्मा ने नगर आयुक्त को एक पत्र लिखा, जिसमें कहा गया था कि जिस भूमि पर अवैध् पार्किग संचालित हो रही है। वह भूमि नगर निगम की है। जिसको खाली करवा कर नगर निगम अपने कब्जे में ले। आरोप हैं कि मेयर अनीता शर्मा के पत्र पर नगर निगम अधिकारियों ने कोई संज्ञान नहीं लिया, तो मेयर साहिबा ने नगर निगम अधिकारियों को यहां तक कह दिया कि यदि वह जनहित के काम नहीं कर सकते तो उनको कार्यालयों में बैठने का कोई अधिकार नहीं है। मेयर ने समय निर्धारित करते हुए चेताया था कि अगर सती घाट पर नगर निगम की भूमि पर चल रही अवैध् पार्किग को नहीं हटाया तो वह नगर निगम कार्यालयों पर ताला बंदी कर देगी। मेयर अनीता शर्मा के दिये गये समय सीमा आज समाप्त होते ही भारी संख्या में कांग्रेसी नेताओं व कांग्रेसी पार्षदों के साथ नगर निगम परिसर में धरना शुरू कर दिया। लेकिन शहर के बडे कांग्रेसी नेताओं के दबाव के चलते मेयर का कार्यालयों पर ताला बंदी कार्यक्रम टांय-टांय फिश हो गया। बताया जा रहा हैं कि कांग्रेसी नेताओं के दबाव को लेकर मेयर पति अशोक शर्मा काफी भावुक व असहाय नजर आये। भले ही कांग्रेसी नेताओं ने ताला बंदी कार्यक्रम का निर्णय बदलने का कारण यह कहते हुए अपनी किरकरी होने से बचाई कि नगर निगम कार्यालयों में ताला बंदी से शहर की जनता को परेशानी उठाने पडेगी। जबकि वह जनहित के लिए ही नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ आवाज उठा रहे है। मगर कांग्रेसी नेताओं ने दहाडते हुए मेयरपति का मनोबल जरूर बढाने का प्रयास किया कि वह मेयर का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगे। यदि निगम अधिकारियों की हठधर्मिता नहीं रूकती तो कांग्रेस जनहित के लिए जनआदोंलन करने के लिए बाध्य होगी। एक तरफ मेयर की नगर निगम में अधिकारियों द्वारा उपेक्षा और दूसरी ओर शहर के कांग्रेस नेताओं द्वारा उनके निर्णय के साथ न होने से मेयरपति अशोक शर्मा खिन्न दिखाई दिये और उन्होंने सार्वजनिक तौर आवेश में आकर यहां तक चेतावनी दे डाली कि अगर मेयर की उपेक्षा और जनहित को नजर अंदाज किया जाता रहा तो वह अपने उपर पेट्राॅल डालने से भी पीछे नहीं हटेगें।
