चार स्वर्ण पदक सहित नौ पदक जीते
अशोक वर्मा/ हरीश संतवानी
हरिद्वार। पुडूचेरी में हुए 25वें अंतरराष्ट्रीय योगा महोत्सव में हरिद्वार स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय ने कई पदक जीतकर उत्तराखण्ड का नाम एक बार फिर रोशन किया है। प्रतियोगिता में देसंविवि ने चार स्वर्ण सहित कुल नौ पुरस्कार जीतकर योग के क्षेत्र में देवभूमि का लोहा मनवाया है। विवि लौटने पर प्रतिभागियों का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। लौटने पर गायत्री परिवार के अभिभावक व देसंविवि के कुलाधिपति डाॅ. प्रणव पण्डया ने सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि विवि का वातावरण, आहार प्रबंधन एवं शारीरिक संतुलन विद्यार्थियों को सतत आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने गीता के विभिन्न सूत्रों के माध्यम से जीवन में योग की उपयोगिता एवं महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। शैलदीदी ने कहा कि हमारे बच्चे योग प्रदर्शन ही नहीं, योग के सूत्रों को जीवन में अपना रहे हैं, जिससे शारीरिक एवं मानसिक संतुलन सहज हो रहा है। उन्होंने कहा कि भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच योग संजीवनी बूटी की तरह है। देसंविवि के योग कोच डाॅ. अमृत गुर्वेन्द्र ने बताया कि योग की जागरूकता एवं उसके प्रचार-प्रसार के उद्देश्य पुडूचेरी सरकार व पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्त्वावधन में प्रत्येक वर्ष जनवरी के प्रथम सप्ताह में योग के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन होता है। इसमें भारत सहित अनेक देशों के योग प्रशिक्षु एवं योग विज्ञान के विद्यार्थी भागीदारी करते हैं। प्रतियोगिता कई आयु वर्ग में आयोजित होती हैं। इस वर्ष देसंविवि व गायत्री विद्यापीठ से 14 छात्रा-छात्राएँ भागीदारी करने पहुँचे थे, इसमें चार स्वर्ण सहित कुल नौ विद्यार्थियों ने पदक विवि जीते। 10 से 15 आयु के बालक वर्ग में गायत्री विद्यापीठ के 9वीं के छात्रा रोहित यादव ने देश-विदेश के सौ से अधिक प्रतिभागियों को पछाड़ते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। 21 से 25 आयु वर्ग में बालक वर्ग देसंविवि के रुपेश कुमार, 16 से 20 आयु वर्ग के महिला वर्ग में देसंविवि की ज्योति कुमारी, 21 से 25 आयु के महिला वर्ग में देसंविवि की श्वेता मलिक ने स्वर्ण पदक जीतकर एक बार पुनः देवभूमि का नाम रोशन किया। तो वहीं पुरुष वर्ग में ज्ञानेश्वर, विकास कुमार, दीपेन्द्र कुमार ने तथा महिला वर्ग में शोभा सिंह, डाॅ. गायत्री गुर्वेन्द्र को योगा एक्सीलेंसी अवार्ड से नवाजा गया। डाॅ. अमृत गुर्वेन्द्र ने बताया कि इस प्रतियोगिता में भारत सहित चीन, दक्षिण कोरिया, वियतनाम आदि देशों के एक हजार से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
