♦बागपत निवासी युवक से झूठे मुकदमें से निकालने के एवज में की थी लाखों की डिमांड
♦एसएसपी को पीडित ने रिश्वत लेने की वीडियों व ओडियों समेत अन्य साक्ष्य कराये उपलब्ध
♦तत्कालीन एसएसपी ने पूरे प्रकरण की जांच तत्कालीन एसपी देहात को थी सौपी
♦जांच के दौरान दोनों दरोगाओं पर हुए थे आरोप सि़द्व, जिसके बाद हुई कार्यवाही
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। एसएसपी हरिद्वार ने उत्तर प्रदेश के बागपत निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर दो दरोगाओं के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कराया है। आरोप हैं कि दोनों दरोगाओं ने पीडित व्यक्ति के छोटे भाई के खिलाफ दर्ज मुकदमें की निष्पक्ष जांच करने की बजाय उनको डरा धमकाते हुए गोली मारने की धमकी देकर मामले में अन्तिम रिपोर्ट लगाने के नाम पर लाखों की रकम वसूली थी। तत्कालीन एसएसपी ने पूरे प्रकरण की जांच तत्कालीन एसपी देहात को थी सौपी, जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर हुई कार्यवाही।
प्राप्त जानकारी के अनुसार निश्चय राणा पुत्र स्वः ब्रजपाल सिंह निवासी ग्राम व पोस्ट निरपुडा थाना दोघट तहसील बडौत जिला बागपत ने कोतवाली गंगनहर में तहरीर देकर शिकायत की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सुषमा सैनी द्वारा कोतवाली गंगनहर रूडकी हरिद्वार में 05 जुलाई 23 को उसके छोटे भाई निवेश राणा के खिलाफ एक झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया था। महिला ने घटना मुकदमा दर्ज करने से 5 माह पूर्व यानि फरवरी माह 2023 की बताई गयी थी। जिसमें तत्कालिन विवेचक उपनिरीक्षक मंदीप सिंह द्वारा यह जानते हुए कि उक्त मुकदमा पूर्ण रूप से फर्जी वह झूठा है। आरोप हैं कि उसके बावजूद विवेचक उपनिरीक्षक मंदीप सिंह ने उनके साथ गाली गलौच करते हुए डराकर धमकाकर तथा उसके छोटे भाई निवेश राणा को गोली मारने की धमकी भी दी गई थी।
आरोप हैं कि उसके छोटे भाई को जीवन व मौत का भय दिखाकर विवेचक ने उनसे अन्तिम रिपोर्ट लगाने के नाम पर 03 लाख 50 हजार जबरदस्ती डरा व धमका कर रिश्वत लेते हुए मुकदमें में 06 अक्टूबर 2024 को अंतिम रिपोर्ट प्रेषित कर दी थी। लेकिन पुनः उसको जानकारी मिली की उक्त मुकदमें में पुनः विवेचना प्रारम्भ हो गयी है। दोबारा मुकदमें के विवेचक उपनिरीक्षक बलवंत पंवार को बनाया गया। उपनिरीक्षक बलवंत पंवार ने उनको बुलाया और कहा कि पूर्व विवेचक ने अंतिम रिपोर्ट लगाते समय मजबूत कार्यवाही नहीं की। जिसकारण मुकदमें की पुनः विवेचना शुरू हो गई है।
पीडित ने तहरीर में आरोप लगाया हैं कि दूसरे विवेचक उपनिरीक्षक बलवंत पंवार ने उनसे मजबूत कार्य करते हुए अंतिम रिपोर्ट लगाने के एवज में 05 लाख की डिमांड की। पीडित ने विवेचक बलवंत पंवार को बताया कि उन्होंने तो पूर्व विवेचक को बिना गलती के ही दबाव में आकर रुपए दे दिए थे अब हमारे पास इतने रुपए नहीं है, तो विवेचक बलवंत पवार ने कहा कि तुम्हारी मर्जी है नहीं तो तुम्हारे भाई निवेश राणा को गोली मारकर जेल भेजा जायेगा। आरोप हैं कि उसने पुनः डर के कारण अपने छोटे भाई का जीवन बचाने के लिए 01 लाख रूपये उपनिरीक्षक बलवन्त पंवार को दे दिये। लेकिन उपनिरीक्षक बलवंत पवार 04 लाख रूपये की अतिरिक्त मांग करने का दबाब बनाने लगे, उसने इतनी बड़ी रकम की व्यवस्था न होने की बात विवेचक श्री पंवार को बताई तथा जब उसने अतिरिक्त रुपए देने से मना कर दिया। विवेचक उपनिरीक्षक बलवंत पंवार ने हमारा काम जानबूझकर रोक दिया तथा कहा कि बिना पैसे दिए काम नहीं किया जाएगा।
पीडित ने तहरीर में आरोप लगाया कि विवेचक बलवंत पंवार ने धमकाया कि यदि 04 लाख नहीं दिये तो तेरे छोटे भाई निवेश राणा को गोली मारकर जेल भेज देगे। साथ ही दरोगा बलवंत पवार ने उसको धमकाया कि अगर इस मामले के बारे में किसी के सामने जुबान खोली तो तुमको भी किसी झूठे केस में फंसा कर जेल भेज दूंगा। वह स्वंय और उसका छोटा भाई निवेश राणा भयभीत हो गए, उक्त पूरे प्रकरण के संबंध में उसके पास मजबूत साक्ष्यों के रूप में रुपए के लेन देन की विडियों, आडियों व कुछ स्क्रीन शॉट भी मौजूद है जोकि वह जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसी व विवेचक को उपलब्ध करा दूंगा। इस पूरे प्रकरण के सम्बंध में उसके द्वारा 01 जुलाई 25 को तत्कालीन एसएसपी को पुख्ता साक्ष्यों के साथ शिकायत की गई।
तहरीर में कहा गया हैं कि तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा मामले की गम्भीता को देखते हुए पूरे मामले की जांच पुलिस अधीक्षक ग्रामीण हरिद्वार को सौपी गई। एसपी देहात की जांच में उसके द्वारा उपलब्ध कराये गये मजबूत साक्ष्यों के आधार पर दोनों उपनिरीक्षक पर आरोप सही पाये गये। इस प्रकार उपरोक्त दोनों लोक सेवको द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उनके वैध कार्य को करने के बदले भी हम पीडितों से जबरदस्ती डरा धमका कर जीवन व मौत का भय दिखाकर अवैध रूप से रिश्वत ली गई है।
जबकि रिश्वत लेना सरकारी गलती नहीं बल्कि क्रमिनल अपराध है इसलिए केवल चेतावनी देकर छोड़ा नहीं जा सकता, इसलिए उक्त दोनो उपनिरक्षकों द्वारा अपने-अपने पदो का दुरुपयोग करते हुए उस पीड़ित के सामने ही मेरे छोटे भाई को डराने धमकाने गाली गलौच करते हुए धमकी देकर जीवन वह मौत तथा दर्ज फर्जी मुकदमे में 10 वर्ष तक के कारावास का भय दिखाकर हमको डरा धमका कर अपने अनुचित प्रभाव में लेकर जो उक्त अनुचित व अवैध धन की जबरन वसूली उससे दोनों उपनिरीक्षकों द्वारा भ्रष्टाचार करते हुए रिश्वत के रूप में ली गयी। पीडित की तहरीर के आधार पर दोनों उपनिरीक्षकों के खिलाफ जांच के बाद एसएसपी के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर लिया।



