■तत्कालीन प्रभारी पीएमएस ने कांग्रेस कार्यकर्त्ता के कहने पर दिया बैड
■जिला अस्पताल चिकित्साधिकारी ने बैड वापस मांगने की कवायद की शुरू
■पत्रकार चिकित्साधिकारी व तत्कालीन पीएमएस का नहीं उठा रहा फोन
■कुछ समय के लिए मांगे गये बैड को हो चुका ढाई साल से अधिक का समय
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। जिला अस्पताल हरिद्वार के वर्ष 2021 के तत्कालीन प्रभारी पीएमएस पर अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल करने का आरोप है। तत्कालीन प्रभारी पीएमएस पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने अपने निजी सम्बंधों को भुनाने के लिए सरकारी फलोअस बैड एक चर्चित पत्रकार को दे दिया। लेकिन ढाई साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी चर्चित पत्रकार ने सरकारी बैड को जिला अस्पताल में वापस नहीं किया है। मामला मौजूदा वक्त में तैनात चिकित्साधिकारी के संज्ञान में आने पर जिला अस्पताल के फलोअस बैड़ वापिस लाने की कवायद शुरू हो गयी है। जिसके लिए चिकित्साधिकारी ने पत्रकार को फोन लगाया। लेकिन पत्रकार ने चिकित्साधिकारी का फोन रिसिव नहीं किया।
जिला अस्पताल के चिकित्साधिकारी ने जब मामले के सम्बंध में तत्कालीन प्रभारी पीएमएस, जोकि फिलहाल मेला अस्पताल में सीएमएस पद पर तैनात है के संज्ञान में मामला डाला गया। चिकित्साधिकारी के अनुसार तत्कालीन प्रभारी पीएमएस ने भी पत्रकार को फोन लगाया, लेकिन उनका भी फोन रिसिव नहीं हुआ है। जिला अस्पताल से सरकारी बैड ले जाने का मामला सुर्खियों में छाया हुआ है।
जिला अस्पताल में बुजुर्ग व गम्भीर मरीजों के लिए व्हीलचेयर ना होने का समाचार प्रकाशित हुआ, तभी अस्पताल में मौजूदा वक्त में तैनात मेटन ने जानकारी दी कि जिला अस्पताल से एक पत्रकार 05 मार्च 2021 को एक फलोअस बैड विद चांबी के साथ ले गया था। लेकिन आज तक पत्रकार ने बैड वापस नहीं्रे किया है। पत्रकार ने फलोअस बैड ले जाते वक्त बैड की रिसिविंग भी दी हैं, जोकि हमारे रजिस्ट्रर में संलग्न है।
मामला जिला अस्पताल के चिकित्साधिकारी डॉ. विकास दीप के संज्ञान में आने पर उनके द्वारा सरकारी बैड को वापस लाने के लिए पत्रकार को फोन किये गये, लेकिन पत्रकार ने फोन रिसिव नहीं किया। जिसके बाद सरकारी सम्पत्ति ले जाने का मामला जिला अस्पताल में सुर्खियों में आ गया। जिला अस्पताल के सरकारी फलोअस बैड को पत्रकार से वापस मांगने की कवायद भी शुरू हो गयी।
बताया जा रहा हैं कि जिला अस्पताल के चिकित्साधिकारी डॉ. विकास दीप ने तत्कालीन प्रभारी पीएमएस के संज्ञान में मामला डाला गया। जिन्होंने पत्रकार को बैड वापस करने के लिए फोन किया गया। आरोप हैं कि तत्कालीन प्रभारी पीएमएस ने एक कांग्रेसी कार्यकर्त्ता के कहने पर पत्रकार पर विश्वास कर कुछ समय के लिए अपने रिस्क पर फलोअस बैड दे दिया था। लेकिन इसी दौरान तत्कालीन प्रभारी पीएमएस का ट्रॉसफर माह दिसम्बर 21 में मेला अस्पताल के सीएमएस पद पर हो गया।
तत्कालीन प्रभारी पीएमएस भी पत्रकार को जिला अस्पताल से सरकारी फलोअस बैड देकर भूल गये। लेकिन पत्रकार की जो जिम्मेदारी बनती थी उसने भी अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से नहीं निभाया। जिला अस्पताल से कुछ समय के लिए मांग कर ले जाया फलोअस बैड ढाई साल से अधिक समय बीतने के बाद भी पत्रकार ने नहीं लौटाया है। जबकि सरकारी सम्पत्ति को किसी भी अघिकारी को अपने निजी सम्बंधों को भुनाने के लिए देने का कोई अधिकार नहीं है।
सवाल उठता हैं कि तत्कालीन प्रभारी पीएमएस ने एक कांग्रेसी कार्यकर्त्ता के कहने पर सरकारी सम्पत्ति को कैसे एक पत्रकार को दे दिया। आरोप हैं कि जिला अस्पताल प्रभारी पीएमएस ने अपने निजी सम्बंधों को बनाये रखने के लिए अपने पद का दुरूपयोग किया। यदि पत्रकार द्वारा सरकारी सम्पत्ति वापस नहीं करता तो उसकी भरपाई भी तत्कालीन प्रभारी पीएमएस से की जानी की मांग जिला अस्पताल में उठने लगी है।
जिला अस्पताल चिकित्साधिकारी डॉ. विकास दीप ने बताया कि अस्तपाल के तत्कालीन प्रभारी पीएमएस द्वारा एक पत्रकार की मदद करने के इरादे से कुछ समय के लिए अस्पताल से सरकारी फलोअस बैड विद चांबी के साथ दिया गया था। पत्रकार ने 05 मार्च 2021 को जिला अस्पताल से फलोअस बैड लेते वक्त रिसिविंग भी दी है। जोकि हमारे रिकार्ड में शामिल है। पत्रकार द्वारा ढाई साल से अधिक का समय बीत जाने पर भी अस्पताल से कुछ समय के लिए मांग कर ले जाया गया फलोअस बैड वापस नहीं किया है। जिसके सम्बंध में उनके द्वारा दो बार पत्रकार को फोन किया गया, लेकिन पत्रकार ने फोन नहीं उठाया।
उन्होंने बताया कि जिसके सम्बंध में तत्कालीन प्रभारी पीएमएस के संज्ञान में मामला डाला गया। जिन्होंने माना कि हां उनके द्वारा कुछ समय के लिए पत्रकार को फलोअस बैड विद चांबी दिया गया था। लेकिन उन्होंने सोचा कि शायद उसने वापस कर दिया होगा। जब उनको मालूम हुआ कि बैड वापस नही किया गया तो उन्होंने भी पत्रकार को फोन लगाया, लेकिन पत्रकार ने मदद करने वाले तत्कालीन प्रभारी पीएमएस को फेान नहीं उठाया। पत्रकार द्वारा जिला अस्पताल से सरकारी बैड ले जाने का मामला गरमाया हुआ है।
