भारत सहित 125 से अधिक देशों के लोग अपना रहे हैं सहजयोग
मुकेश वर्मा
हरिद्वार। 02 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री जयंती पर सहजयोग का 12 भारतीय भाषाओं में आत्म साक्षात्कार का भव्य आयोजन आनलाईन किया जा रहा है। मार्च 2020 से पूरे विश्व में कोरोना महामारी का प्रकोप फैला हुआ है। प्रत्येक व्यक्ति भय और आशंका से ग्रसित है। हम सभी जानते हैं कि आज विश्व जिस स्थिति में हैं उसका कारण हैें आज की इन परिस्थितियों में ईश्वरीय शक्ति ही एक मात्रा आशा की किरण है। कुंडलिनी जागरण के द्वारा आत्म साक्षात्कार के अनुभव से ही हम अपने अंदर स्थित ईश्वरी शक्ति को जान सकते है। श्रीमाताजी निर्मला देवी ने 1970 में सहजयोग प्रारम्भ किया था। जिसमें कुंडलिनी जागरण के द्वारा ईश्वरीय शक्ति से आसानी से जुडा जा सकता है। देश के दो महापुरूषों राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री जयंती 2 अक्टूर 20 को 12 भाषाओं में सुबह 8 बजे से लेकर शाम 8 बजे तक कुंडलिनी जागरण द्वारा ईश्वरीय शक्ति से जुड़ने के लिए आत्म साक्षात्कार का कार्यक्रम आनलाईन आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में सहजयोग का लाइव प्रसारण भी किया जाएगा। कार्यक्रम का शुभांरभ संस्कृत में होकर दिनभर हिन्दी, बंगाली, तेलुगु, तमिल, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, पंजाबी, मराठी, उड़ीसा और अंग्रेजी से समापन होगा। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सभी सत्य के खोजियों एवं ईश्वरीय शक्ति से जुड़ने के इच्छुक लोगों को सहजयोग परिवार आमंत्रित करता है। सहजयोग सामूहिक ध्यान शक्ति मानव शरीरर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सशक्त बनाती है। और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाती है, जिससे शरीर निरोगी रहता है। आज विश्व के भारत सहित 125 से अधिक देशों में सभी धर्म व जाति के लोगों द्वारा सहजयोग ध्यान को अपनाया जा रहा है। इस विषम समय में भी विश्व के इन देशों में भी सहजयोगी ध्यान के द्वारा अपने जीवन का आनंद उठा रहे है। कोविड-19 से निर्मित आपदा के प्रभाव को कम करने एवं उसके उन्मूलन की दिशा में सहजयोग सामूहिक ध्यान शक्ति एक कारगर साबित हो रहा है। इस दिशा में विश्वभर में फैले हुए अनेक देशों के लाखों सहजयोगी साध्क लाॅकडाउन और समाजिक दूरी के इस दौर में अपने-अपने घरों में प्रतिदिन आनलाइन सामूहिक ध्यान शक्ति से इस विश्वव्यापी बाधा को समाप्त करने के लिए प्रार्थनाए, हवन-पूजन एवं सहजयोग ध्यान पद्धति से जुडी सभी दिव्य युक्तियों का प्रयोग अपने-अपने स्थानों से कर रहे है।
